{"product_id":"2346-2352-2367-2357-2366-2352-2350-2375-2306-2346-2352-2367-2357-2352-2381-2340-2344-2360-2306-2352-2330-9781365642562","title":"\u0026#2346;\u0026#2352;\u0026#2367;\u0026#2357;\u0026#2366;\u0026#2352; \u0026#2350;\u0026#2375;\u0026#2306; \u0026#2346;\u0026#2352;\u0026#2367;\u0026#2357;\u0026#2352;\u0026#2381;\u0026#2340;\u0026#2344;: \u0026#2360;\u0026#2306;\u0026#2352;\u0026#2330","description":"\u003cp\u003e • Author(s): राजवंë\u003cbr\u003e • Publisher: Lulu.com\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lulu.com\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eभारत वर्ष मुख्य रूप से गाँवों का देश रहा है एवं अभी भी यह गाँवों का ही देश है। आज ग्रामीण समाज परिवर्तन एवं रूपान्तरण की प्रक्रिया से गुजर रहा है। आधुनिक शक्तियों के प्रभावी होने से इस प्रक्रिया में और अधिक तेजी आई है तथा ग्रामों के अनेक महत्वपूर्ण पक्षों मंे व्यापक परिवर्तन हो रहे है। आज संयुक्त परिवार 'परिवार' व्यवस्था में स्पष्ट रूप से परिवर्तन होते दिखाई पड़ रहे है तथा धीरे-धीरे विघटन की ओर अग्रसर होते जा रहे है।\u003c\/p\u003e","brand":"Lulu.com","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":47890070470807,"sku":"9781365642562","price":926.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9781365642562.webp?v=1781178726","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/2346-2352-2367-2357-2366-2352-2350-2375-2306-2346-2352-2367-2357-2352-2381-2340-2344-2360-2306-2352-2330-9781365642562","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}