{"product_id":"2346-2381-2351-2366-2352-2325-2368-2336-2306-2337-2368-2361-2357-2366-2310-2319-2325-2361-2368-2306-23-9781807158743","title":"\u0026#2346;\u0026#2381;\u0026#2351;\u0026#2366;\u0026#2352; \u0026#2325;\u0026#2368; \u0026#2336;\u0026#2306;\u0026#2337;\u0026#2368; \u0026#2361;\u0026#2357;\u0026#2366; \u0026#2310;\u0026#2319; \u0026#2325;\u0026#2361;\u0026#2368;\u0026#2306; \u0026#23","description":"\u003cp\u003e • Author(s): गुरु द\u003cbr\u003e • Publisher: Bookleaf Publishing\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Bookleaf Publishing\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eइस पुस्तक में संकलित कविताओं का मुख्य विषय प्रेम है। प्रेम के मिलन और विरह दोनों ही रूपों का सुंदर समावेश है। सामान्य जन मानस की पीड़ा की अभिव्यक्ति के साथ समकालीन सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक विसंगतियों, विषमताओं, विद्रूपता एवं शोषण आदि विषयों पर भी यह संकलन मुखर है। स्त्री-पुरुष के परस्पर आकर्षण से उत्पन्न प्रेम के साथ देश, समाज एवं मानवता के प्रति प्रेम का भी इसमें विशद वर्णन है। परमात्मा है या नहीं इस पर शायद सब एकमत न हों किन्तु जीवन और प्रेम के अस्तित्व पर सभी एकमत हैं। कवि की प्रेम के प्रति अडिग आस्था और अनंत विश्वास की द्योतक हैं ये कविताएं।\u003c\/p\u003e","brand":"Bookleaf Publishing","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":47595146150039,"sku":"9781807158743","price":1022.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9781807158743.webp?v=1774988607","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/2346-2381-2351-2366-2352-2325-2368-2336-2306-2337-2368-2361-2357-2366-2310-2319-2325-2361-2368-2306-23-9781807158743","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}