{"product_id":"9788119989201-shaalgirah-ki-pukar-per","title":"Shaalgirah Ki Pukar Per","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Mahashweta Devi\u003cbr\u003e • Publisher: Radhakrishna Prakasan Pvt Ltd\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Radhakrishna Prakasan Pvt Ltd\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eहिन्दुस्तान में गोराशाही लूट पर टिकी थी। व्यापार करने आई ईस्ट इंडिया कम्पनी ने लूट-व्यापार को स्थायी बनाने के लिए षड्‌यंत्र और सैनिक हस्तक्षेप के ज़रिए 1757 में प्लासी-युद्ध में जीत के बाद सत्‍ता हाथ में ले ली। मगर रियाया पर प्रभुत्व स्थापित करना आसान न था। गोरों के ख़िलाफ़ असन्तोष फैलने लगा था। मुनाफ़े के लिए गोरे अकाल और भूख की तिजारत कर रहे थे। अपने शासन-क्षेत्र का विस्तार कर रहे थे। बिहार-बंगाल के जंगल के दावेदार संथालों से अपना लोहा मनवाने और उनकी स्वतंत्र-प्रवृत्ति पर क़ाबू पाने के लिए गोरों ने जंगल-उत्पादों, धान-चावल की ख़रीद शुरू की। गोरों ने बाज़ार को हथियार बनाया। संथाल भड़क उठे और विद्रोह की कमान सँभाली संथाल परगना के आदि विद्रोही तिक्का माँझी ने। संथाल जीवन और गोरों के विरुद्ध उनके ऐतिहासिक संग्राम की गाथा दर्ज है। ‘शाल-गिरह की पुकार’ में प्रख्यात लेखिका महाश्वेता देवी की प्रखर लेखनी से। यह न केवल इतिहास है बल्कि हर भारतीय के लिए गौरव-स्मृति भी है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Radhakrishna Prakasan Pvt Ltd","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46910149722263,"sku":"9788119989201","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788119989201.webp?v=1770876787","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/9788119989201-shaalgirah-ki-pukar-per","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}