{"product_id":"9788126713318-kumbhipak","title":"Kumbhipak","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Nagarjun\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: Ancient, Classical \u0026amp; Medieval\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eकुम्भीपाक नामक नरक की रचना जिन जीवन-स्थितियों से हुई होगी, नागार्जुन का यह उपन्यास उन्हीं के शब्दांकन का परिणाम है । एक ही मन में रहनेवाले छः किरायेदारो की जीवनचर्या पर केन्द्रित यह उपन्यास हमारे 'विकासमान' नागर-जीवन के जिस सामाजिक यथार्थ की परतें खोलता है, प्रकारांतर से वह समूचे भारतीय जीवन का यथार्थ है, क्योंकि स्त्री के प्रति पदार्थवादी नजरिये की कहीं कोई कमी नहीं । आर्थिक अभावों में पिसती अनेकानेक निर्दोष जिवानेच्छाएं किस प्रकार भोगवाद की भट्टी में झोंक दी जाती हैं, उनकी पीड़ा और मुक्तिकामी छटपटाहट को नागार्जुन ने गहरी आत्मीयता से उकेरा है । साथ ही, नागार्जुन यहाँ उस दृष्टि को प्रस्थापित करते हैं जो स्त्री की सामाजिक भूमिका और मानवीय गरिमा के प्रति सचेत है ।.\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46910154113175,"sku":"9788126713318","price":139.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126713318.webp?v=1770876833","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/9788126713318-kumbhipak","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}