{"product_id":"9788199170902-thasak","title":"Thasak","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Mamta Kalia\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eवरिष्ठ कथाकार ममता कालिया की इन कहानियों में आज का वक़्त अपनी तमाम विडम्बनाओं के साथ मौजूद है। नब्बे के दशक के दौरान और उसके बाद हमारे समाज ने जीवन के जिन नये रूपों को देखा और भोगा वह उससे पहले हमारे दैनिक अनुभवों का हिस्सा नहीं थे। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e उदारीकरण आया, और अपने साथ ऐसी अनेक चीजें लेकर आया जिनसे हमारा जीने और देखने का तरीक़ा एकदम बदल गया—मोबाइल, इंटरनेट, बैंकिंग की नयी-नयी पद्धतियाँ, एटीएम, मल्टीप्लेक्स, मनोरंजन के चारों दिशाओं में पसरे नए-नए साधन और इन सबका बिना किसी हिचक सुख भोगने के लिए जरूरी निश्चितता। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e इन कहानियों में ममता कालिया ने बिल्कुल इसी दौर में जन्मे नए कथाकार जैसी ताज़गी और सहजता के साथ इन सब चीज़ों से बनते नए वक़्त और नए नागरिक के चित्र खींचे हैं। ख़ास बात यह कि यह सुनी-पढ़ी सूचनाओं के नहीं, प्राथमिक और आँखों देखे अनुभवों के चित्र हैं। मशीनी सुगमता में बीतते जीवन ने अपने को इन कहानियों में इतने स्पष्ट रूप में अंकित किया है कि ममता जी की भाषा और कहन के प्रवाह में डूबा पाठक भी, उन्हें महसूस करने से नहीं बच पाता। यही विशेषता इन कहानियों को लगभग इन्हीं विषयों पर लिखी जा रही अनेक कहानियों के मुक़ाबले ज़्यादा विशिष्ट बनाती है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46910151458967,"sku":"9788199170902","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788199170902.webp?v=1770876818","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/9788199170902-thasak","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}