{"product_id":"9788199170988-ladakiyaan","title":"Ladakiyaan","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Mamta Kalia\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003e‘लड़‌कियाँ’\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e को ममता कालिया की उन कथा-रचनाओं में रखा जा सकता है जहाँ उनकी गद्य-सामर्थ्य अपने चरम पर है। छल-छल बहते वाक्यों की चुस्ती, व्यंग्य की सूक्ष्मता, तीक्ष्ण आब्ज़र्वेशन और उसकी सटीक अभिव्यक्ति, हाथ से छुई जा सकने वाली चित्रात्मकता—शब्द की ताक़त जो आपको फ़ौरन पकड़ लेती है, और अपने साथ बहा ले जाती है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e बम्बई का एक पुराना मैंशन इस कहानी की पृष्ठभूमि है। उसके एक फ़्लैट में नायिका अकेली रहती है। नौकरीपेशा है। जीवन ऑफ़िस और घर के बीच आने-जाने और विज्ञापन फ़िल्मों के लिए नए प्लॉट सोचने में गुज़र रहा है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e तभी कुछ दिन के लिए उसके बॉस की एक रिश्तेदार अफ़शाँ पाकिस्तान से आती है और उसके पास ही रहने लगती है। जीवन की एकरसता भंग होती है। दीवाली पर उसका जो फ़्लैट वीरान पड़ा रहता था, अफ़शाँ के जलाए दीयों से रात-भर जगमगाता रहता है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e कहानी का अन्त दोनों के बीच एक मामूली-से संदेह के उगने और फिर उसके ख़त्म होने पर होता है और इस सन्देश पर कि मुसीबत आए तो हथियार नहीं, इनसान ही काम आता है। लेकिन इसके बीच यह छोटा-सा उपन्यास बम्बई, वहाँ के जीवन, रोज़मर्रा के संघर्षों और लोगों के बारे में बहुत कुछ बता जाता है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46910151491735,"sku":"9788199170988","price":139.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788199170988.webp?v=1770876820","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/9788199170988-ladakiyaan","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}