{"product_id":"9788199312272-mahua-ka-ped","title":"Mahua Ka Ped","description":"\u003cp\u003e • Author(s): P. Baidyanath\u003cbr\u003e • Publisher: Radhakrishna Prakasan Pvt Ltd\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Radhakrishna Prakasan Pvt Ltd\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003e‘महुआ का पेड़’\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e गाँव और शहर के विरोधाभास और उनके बीच आवाजाही करते सीधे-सादे पात्रों की ऐसी कहानियों का संग्रह है जो हमारे समय के यथार्थ को एकदम सरल और सहज भाषा में रेखांकित करती हैं। सरल हृदय लोगों की उदारता और स्वार्थ में अन्धे हुए लोगों की विद्रूपता के कई लोमहर्षक चित्र ये कहानियाँ हमारे सामने उपस्थित करती हैं।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e मनुष्यता को लेकर एक अन्तहीन उम्मीद इन कहानियों का वह आधार है जो कहीं कमजोर नहीं पड़ता। राबिया का सरल समर्पण हो या सुकुल बाबू और सुलक्षणा का मानवता के प्रति उदात्त व्यवहार; लेखक की निगाह अपने सूक्ष्म पर्यवेक्षण से जीवन में उन तन्तुओं की तलाश कर ही लेती है, जिनसे मनुष्य समाज प्रेरणा ग्रहण कर सकता है, और हताशा के अँधेरों में भी अपनी राह पा सकता है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e ‘झूठी शान’ कहानी के नितेश और चन्दा अपने समाज की रूढ़ियों को ही किस तरह एक आधुनिक मोड़ देते हैं, यह देखने लायक है, इसी तरह जुम्मन द्वारा अपनी बकरी और उसके बच्चों को बचाने का संघर्ष मानव-मन की जटिल प्रकृति के उजले पक्ष को दिखाता है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e इन कहानियों की एक उल्लेखनीय विशेषता इनकी सरल संरचना है जो इन्हें हर पाठक के लिए पठनीय बनाती है। कथाकार ने कहीं भी उपदेश देने का प्रयास नहीं किया, बल्कि जीवन के यथार्थ को एक सुन्दर कथा के रूप में ढालते हुए वे पाठक को सोचने के लिए प्रेरित करते हैं, ताकि वह अपने परिवेश के स्याह-सफ़ेद को स्वयं देख सके।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Radhakrishna Prakasan Pvt Ltd","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46910155522199,"sku":"9788199312272","price":139.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788199312272.webp?v=1770876832","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/9788199312272-mahua-ka-ped","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}