{"product_id":"9788199356047-ek-patni-ke-notes","title":"Ek Patni Ke Notes","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Mamta Kalia\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003e‘एक पत्नी के नोट्स’\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e दाम्पत्य की विरूपता की मर्मान्तक कथा है। पत‌ि-पत्नी का एक रिश्ता जो सरल प्रेमपगी काव्य पंक्त‌ियों की तरह शुरू हुआ, दाम्पत्य में बदलते ही जैसे नागफनी हो गया। संदीप जो एक सम्पूर्ण और सुरुचिपूर्ण पुरुष के रूप में कविता को मिला, प‌त‌ि बनते ही एक विकृत, क्रुकंड व्यक्ति में बदल गया।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e यह उपन्यास विवाह नामक संस्था के उन पक्षों को दिखाता है जहाँ स्त्री एक असहाय-निरुपाय इकाई और पुरुष, अगर वह संदीप की तरह अपने जीवन में सफल और उच्च पदासीन हो तो केवल एक अध‌िकारवादी विकृत पति।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e सबके सामने आदर्श दम्पती के रूप में प्रशंसित संदीप और कविता की यह कहानी स्त्री-पुरुष सम्बन्ध को सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक स्तर पर लाकर देखती है। साहित्य का व्यापक और गहन अध्ययन भी संदीप को उस मानसिक हिंसा से नहीं रोक पाता, जिसे वह रोज़ अपनी पत्नी के ऊपर आजमाता है, कभी सन्देह से, कभी सीधे अपमान से वह अकसर उसे प्रताड़ित करता है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e साथ ही इतना पजेसिव भी कि कव‌िता की कोई तारीफ़ भी कर दे तो भभक उठे। क‌व‌िता समझ ही नहीं पाती, कि वह क‌ितनी सुखी है, कितनी दुखी।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e दूर से साधारण दिखनेवाले हम लोगों के भीतर कैसे-कैसे विद्रूप छिपे होते हैं और अगर एक संस्था का आवरण मिल जाए तो किस-किस तरह के प्रकट होते हैं, यह भी इस उपन्यास को पढ़ते हुए बराबर महसूस होता है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46910151360663,"sku":"9788199356047","price":139.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788199356047.webp?v=1770876820","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/9788199356047-ek-patni-ke-notes","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}