{"product_id":"9788199356085-narak-dar-narak","title":"Narak Dar Narak","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Mamta Kalia\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003e ‘नरक-दर-नरक’ ममता कालिया\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e के चर्चित उपन्यासों में से एक है। अपने समय का सांगोपांग चित्रण करने वाली यह रचना पाठकों और आलोचकों दोनों की प्रिय रही है। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e उपन्यास के केन्द्र में जगन और उषा हैं जो एक तरह से आज़ादी के बाद पैदा हुई युवा पीढ़ी का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। अच्छा रोज़गार और बेहतर जीवन उनके ऐसे सपने हैं जो अपनी योग्यता के बावजूद उन्हें अपनी पहुँच से दूर दिखाई देते हैं। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e प्रेम और उसके बाद तुरन्त ही शादी के बाद उनका प्यार ही है जो उन्हें राहत देता है, नहीं तो जगन के कॉलेज में वहाँ की राजनीति, मामूली-सी तनख़्वाह और उषा के सामने घर को सँभालने की चुनौती उन्हें तनाव में ही रखती है। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e हारकर वे मुम्बई से इलाहाबाद आते हैं और वहाँ जगन एक प्रेस शुरू करता है। लेकिन चुनौतियाँ यहाँ भी कम नहीं। नया शहर, नया काम और फिर एक बच्चा भी उनके जीवन में आ जाता है। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e दाम्पत्य जीवन और सामाजिक–राजनीतिक तनावों को यह उपन्यास अत्यन्त कुशलता से चित्रित करता है। भाषा की चुस्ती, संवाद और सूक्ष्म मनोभावों का अंकन कहीं भी पाठक को भटकने नहीं देता।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46910151622807,"sku":"9788199356085","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788199356085.webp?v=1770876824","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/9788199356085-narak-dar-narak","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}