{"product_id":"9789347265488-baghin-ki-sawari","title":"Baghin Ki Sawari","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Chandrakishore Jaiswal\u003cbr\u003e • Publisher: Radhakrishna Prakasan Pvt Ltd\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Radhakrishna Prakasan Pvt Ltd\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003e‘बाघिन की सवारी’\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e संग्रह की कहानियाँ जीवन और समाज का एक वृहद \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003e ‘स्पेक्ट्रम’\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e पाठक के सामने रखती हैं। एक के बाद एक कहानी से गुजरते हुए हम कहीं गहन करुणा से आप्लावित होते हैं तो कहीं अपनी दुनिया की विसंगतियों से क्षुब्ध। कहीं किसी पात्र की असहायता हमें भिगो देती है तो कहीं किसी का संकल्प हमें आजादी की एक दिशा दे जाता है। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003e‘ ‘सहेलियाँ’\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e शीर्षक कहानी में दो सखियों की तरह प्रेम और विवाह जैसे विषयों पर खुलकर बतियातीं माँ वत्सला और बेटी गुंजन ऐसे ही पात्र हैं जो धीरे-धीरे बदलते हमारे समय को परम्परा की धारा से एकदम नहीं तोड़ना चाहते और नई सम्भावनाओं—परिवर्तनों से मुँह भी नहीं फेरते। वहीं ‘बेटा का घर’ कहानी के हताश माँ-पिता अपने परिवार में मगन बेटे के व्यवहार और अपनी विवशताओं को सोच आँख गीली कर लेते हैं, और पाठक को मौजूदा समय के प्रति सचेत कर जाते हैं। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e वृद्धावस्था और उससे जुड़े दुखों पर ये कहानियाँ बार-बार दृष्टिपात करती हैं। यह ऐसा विषय है जिस पर चन्द्र‌किशोर जायसवाल अकसर लौटे हैं। इस संग्रह में \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003e ‘रोवनहार’\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e शीर्षक कहानी पूरी तरह इसी विषय पर के‌न्द्रित है जहाँ चार बेटों और बहुओं-पोतों से भरे घर में रामजनम चौधरी को वास्तविक लगाव अपने किराएदार की बच्ची से मिलता है, उन्हें लगता है कि उनके मरने पर और भले कोई न रोए वह जरूर रोएगी। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e संग्रह की शीर्षक कथा \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003e‘ ‘बाघिन की सवारी’\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e सत्ता और सुख से मोहभंग और लगाव की लम्बी कहानी है जिसमें हमारी मुलाकात जवानी में साधु बने एक ऐसे व्यक्ति से होती है जो बीस साल बाद वापस, कदम-दर-कदम चलते हुए समाज और उसके सत्ता-व्यूह में दाखिल होता है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Radhakrishna Prakasan Pvt Ltd","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46910140645527,"sku":"9789347265488","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789347265488.webp?v=1770876727","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/9789347265488-baghin-ki-sawari","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}