{"product_id":"9789349159112-patte-chinaron-ke","title":"Patte Chinaron Ke","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Vinod Prakash Gupta 'Shalabh'\u003cbr\u003e • Publisher: Radhakrishna Prakasan Pvt Ltd\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Radhakrishna Prakasan Pvt Ltd\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eडॉ. विनोद प्रकाश गुप्ता ‘शलभ’ की ग़ज़लों के कथ्य के पीछे विचार होता है और क्राफ़्ट के पीछे है उनका गहरा अभ्यास जो लगातार और गहरा होता गया है। ‘पत्ते चिनारों के’ उनका तीसरा ग़ज़ल-संग्रह है और इसमें संकलित अधिकांश ग़ज़लों में अनेक छवियाँ उन बीते दिनों की हैं जब पूरी दुनिया पर कोरोना के रूप में एक भयावह संकट की छाया मँडरा रही थी। एक सजग नागरिक और संवेदनशील रचनाकार होने के नाते ‘शलभ’ जी उन हालात पर पैनी निगाह रखते हैं जो हमारे व्यक्तिगत जीवन से लेकर प्रकृति तक को प्रभावित करते हैं। वह चाहे धर्मभीरु अवाम की आस्थाओं का दोहन करने के लिए धर्म और राजनीति की दुरभिसन्धियाँ हों, लगातार बढ़ती सामाजिक-आर्थिक विषमता हो, लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सत्ता द्वारा उल्लंघन और अवमूल्यन हो या आम आदमी के उपभोक्ताकारी संजाल में उलझकर व्यक्तित्वहीन हो जाने की दुर्घटना हो, उनकी ग़ज़लें हर इला‌के में होकर आती हैं— हर किसी पर हो रहा है दोषारोपण देश अपना कटघरा क्यों हो गया है उनकी ग़ज़लों की ख़ास विशेषता उनकी ज़बान और सहजता है। सुनते ही याद हो जाने वाले उनके शेर अलग-अलग सन्दर्भों में, जीवन और अहसास के अलग-अलग मौकों पर बरबस याद आ जाने की सलाहियत रखते हैं। हिन्दी ग़ज़ल की परम्परा को और-और समर्थ बनाती हुई उनकी ग़ज़लगोई प्रेम और प्रकृ‌ति को भी साथ लेकर चलती है, उम्मीद का दामन भी नहीं छोड़ती और वक़्त को घायल करने वाली ता​क़तों को बख़्शती भी नहीं।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Radhakrishna Prakasan Pvt Ltd","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46910171250839,"sku":"9789349159112","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789349159112.webp?v=1770876987","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/9789349159112-patte-chinaron-ke","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}