{"product_id":"9789349159556-bhartiya-jelon-mein-panch-saal","title":"Bhartiya Jelon Mein Panch Saal","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Mary Tyler | Tr. Anand Swaroop Verma\u003cbr\u003e • Publisher: Radhakrishna Prakasan Pvt Ltd\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Radhakrishna Prakasan Pvt Ltd\u003cbr\u003e • BISAC: Literary\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eभारतीय जेलों में पाँच साल बीसवीं सदी के सातवें दशक का ऐसा कैमरा है, जिसकी तस्वीरें विभिन्न कोणों से भारत का साक्षात्कार कराती हैं। बंगाल के नक्सलबाड़ी गाँव से नक्सलवादी आन्दोलन की शुरुआत सन् 1967 में हुई थी, जहाँ किसानों ने बड़े ज़मींदारों के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह किया था। धीरे-धीरे यह आन्दोलन बंगाल से देश के अन्य प्रान्तों में फैल गया। विद्रोहियों का उद्देश्य जनता की सरकार क़ायम करना था। विद्रोह को दबाने के लिए दमनात्मक कार्रवाई की गई, जिसके शिकार सिर्फ़ कथित नक्सली ही नहीं हुए बल्कि आम भारतीय किसान और मज़दूर भी हुए। उसी दौरान इस पुस्तक की लेखक मेरी टाइलर को भी विदेशी जासूस समझकर अन्य विद्रोहियों के समान गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया गया था। जेल में रहते हुए उन्होंने विद्रोहियों के जीवन-संघर्ष को काफ़ी निकट से जाना। उन्होंने महसूस किया कि नक्सलियों की जनता के प्रति निष्ठा तथा आत्मबलिदान ही नक्सलवादी आन्दोलन को मिले अपार जनसमर्थन के कारण बने। नक्सलियों की ईमानदार जनपक्षधरता ने मेरी टाइलर को अभिभूत किया। उनके ब्रिटेन से आकर भारत में रहने के पीछे मूल प्रेरणा कृषि-क्रान्ति के लिए हुआ यही सशस्त्र विद्रोह था। यह पुस्तक उनके अनुभवों, संस्मरणों तथा घटनाओं का लेखा-जोखा है, जिसको उन्होंने प्रत्यक्षतः देखा। यहाँ जेल में रहने के दौरान उन्हें भी तरह-तरह की यातनाओं से दो-चार होना पड़ा। नक्सलवादी आन्दोलन के बहाने पुस्तक ऐसे कई दरीचे खोलती है, जहाँ से तत्कालीन भारत की उन सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक स्थितियों से उपजे प्रश्नों को साफ़-साफ़ देखा जा सकता है जिनमें से ज़्यादातर अब तक अनुत्तरित हैं। स्वातंत्र्योत्तर भारत को जानने-समझने के लिए एक ज़रूरी पुस्तक!\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Radhakrishna Prakasan Pvt Ltd","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46910152999063,"sku":"9789349159556","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789349159556.webp?v=1770876827","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/9789349159556-bhartiya-jelon-mein-panch-saal","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}