{"product_id":"9789360861711-himalaya-ne-pukara","title":"Himalaya Ne Pukara","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Gopal Singh Nepali\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eगहरी और सक्रिय राजनीतिक चेतना से सम्पन्न ‘हिमालय ने पुकारा’ की कविताएँ उस भारतीय जन का आह्वान करती हैं जिसके पास साहस भी है और शौर्य का इतिहास भी, लेकिन वह कभी अध्यात्म तो कभी अतिरिक्त सहिष्णु भाव के चलते सम्मुख मौजूद परिस्थितियों को अनदेखा कर जाता है। पुस्तक की भूमिका में नेपाली जी एक कथा के माध्यम से इस ओर इशारा भी करते हैं और तत्कालीन राजनीतिक हालात का हवाला देते हुए सच्चे सैनिक की तरह आम जन-गण को संगठित होकर उठ खड़े होने के लिए प्रे‌रित करते हैं। कह दो कि हिमालय तो क्या पत्थर भी न देंगे लद्दाख की क्या बात है बंजर भी न देंगे आसाम हमारा है रे मर कर भी न देंगे जिस दौर की ये कविताएँ हैं, उसकी पृष्ठभूमि में चीन और भारत का संघर्ष है, इसलिए कई कविताओं-गीतों में उसकी स्पष्ट छवियाँ दिखाई देती हैं। लेकिन जो चीज इन्हें आज भी पुनः-पुनः पठनीय बनाती है, वह है कवि की मनीषा और काव्यात्मक सामर्थ्य। वे छन्द को एक शस्त्र की तरह इस्तेमाल करते हैं, और अपने भावों को भी कहीं अस्पष्ट नहीं होने देते। यह सन्तुलन आज के कवियों के लिए खास तौर पर अनुकरणीय है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46910143529111,"sku":"9789360861711","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789360861711.webp?v=1770876742","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/9789360861711-himalaya-ne-pukara","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}