{"product_id":"9789360864460-bahurupiye","title":"Bahurupiye","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Mohd. Arif\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eमोहम्मद आरिफ़ की कहानियों की सबसे बड़ी ताक़त है उनकी भाषा और क़िस्सा कहने की कला। ये कहानियाँ शुरू होते ही न जाने कब आपको पकड़ लेती हैं और जाने किस हुनर से आपको पंक्ति से पंक्ति थामे चली जाती हैं। ‘बहुरूपिये’ में उनकी छह कहानियाँ संकलित हैं जो अपनी-अपनी जगह से मौजूदा समाज के बहुरूपियापन को सामने लाती हैं। वह चाहे ‘बहुरूपिये’ शीर्षक कहानी का कुली हो या ‘मृत्युदंड’ में अचानक ही एक नये अवतार में प्रकट हो जानेवाला बहुसंख्यक समाज या फिर ‘सिटिज़न रहमान’ में दिखाई पड़नेवाला यह पूरा समय जहाँ बुलडोज़र एक मशीन से ज़्यादा एक वहशी जानवर की तरह घूमता फिरता है, इन कहानियों की तराश में अपनी पूरी भीषणता के साथ प्रकट होता है। संग्रह की एकाधिक कहानियों में भारतीय समाज की बुनावट में आई उन दरारों के डरावने हवाले मिलते हैं, जो इधर बड़ी तेजी से ख़तरनाक होती दिख रही हैं। आकार में कुछ लम्बी इन कहानियों में यह बीता दशक अपने अलग-अलग चेहरों के साथ प्रकट होता दिखता है जिसमें कोरोना के दौरान सामने आए समाज के असली चेहरे भी हैं; कोरोना जो जा चुका और उस नई राजनीति के भी, जो अभी है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46910153228439,"sku":"9789360864460","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789360864460.webp?v=1770876822","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/9789360864460-bahurupiye","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}