{"product_id":"9789360866877-vishvabhasha-hindi-bharatiya-asmita-evam-mahatma-gandhi","title":"Vishvabhasha Hindi : Bharatiya Asmita Evam Mahatma Gandhi","description":"\u003cp\u003e • Author(s): G. Gopinathan\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eमहात्मा गांधी ने न केवल हिन्दी-प्रचार आन्दोलन के द्वारा खड़ी बोली हिन्दी का हिन्दीतर प्रदेशों में और विदेशों में प्रचार-प्रसार किया, बल्कि अपनी पत्रकारिता के माध्यम से उसके आधुनिकीकरण और मानकीकरण का भी बुनियादी प्रयास किया। वे जानते थे कि सरल शब्द अधिक लोगों के दिलों तक पहुँच सकते हैं।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e उनके प्रयासों और भावना को बुनियादी सन्दर्भ बनाकर लिखी गई इस पुस्तक की केन्द्रीय चिन्ता राष्ट्रीय और वैश्विक फलक पर हिन्दी की अवस्थिति और सम्भावित स्थान है। इनसे गुजरने से जो बात सबसे पहले हमारा ध्यान आकर्षित करती है, वह है हिन्दी-सम्बन्धी गांधी-दृष्टि। लेखक की स्पष्ट राय है कि गांधी जी भारत की सभी प्रमुख भाषाओं को जोड़ने में हिन्दी की महत्त्वपूर्ण भूमिका को अपने लेखन में बार-बार रेखांकित करते हैं।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e इस पुस्तक में संगृहीत लेखों में संरचना की दृष्टि से पर्याप्त वैविध्य है। हिन्दी की भूमिका को लेखक ने कई रूपों में रेखांकित किया है। कहीं वह राष्ट्रीय अनुवाद-माध्यम तो कहीं अन्तर-एशियाई अनुवाद एवं सम्प्रेषण की समर्थ भाषा और कहीं विश्वभाषा के रूप में अन्तरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित होने के लिए संकल्पित भाषा के रूप में उपस्थित हुई है।...विश्व हिन्दी सम्मेलनों में लेखक की सहभागिता के परिणाम हैं।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e भाषा, साहित्य और संस्कृति के शिक्षण की प्रविधि क्या हो, भूमंडलीकरण के दौर में भारतीय अस्मिता की रक्षा कैसे हो और उसमें हिन्दी की भूमिका कैसी हो आदि सवालों पर भी लेखक ने इस पुस्तक में गम्भीरतापूर्वक और यथार्थपरक ढंग से विचार किया है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46910142152855,"sku":"9789360866877","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789360866877.webp?v=1770876734","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/9789360866877-vishvabhasha-hindi-bharatiya-asmita-evam-mahatma-gandhi","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}