{"product_id":"9789360868147-jalti-jhadi","title":"Jalti Jhadi","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Nirmal Verma\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eनामवर सिंह के शब्दों में ‘...निर्मल ने यथार्थ की सीमा पार करने की कोशिश की है। उन्होंने तात्कालिक वर्तमान का अतिक्रमण करना चाहा है, कहानी-कला के दायरे से भी बाहर निकलने की कोशिश की है। यहाँ तक कि शब्द की अभेद्य दीवार को लाँघकर शब्द के पहले के ‘मौन जगत’ में प्रवेश करने का भी प्रयत्न किया है।’ मनुष्य के भीतर अवस्थित इस मौन को पकड़ने का प्रयास बार-बार निर्मल जी की कहानियों में दिखाई देता है जिसे वे जीवन के बीचोबीच ही सम्भव करते हैं। जीवन के भावनात्मक जोख़िम से भरे इलाक़ों में मनुष्य की सघन और सूक्ष्म अनुभूतियों को प्रकाशित करनेवाली इस संग्रह की कहानियाँ अकेलेपन, अवसाद, अजनबीयत और आधुनिक जीवन की विडम्बनाओं का अन्वेषण दुर्लभ चित्रात्मकता और प्रामाणिकता के साथ करती हैं। सन् 1965 में पहली बार प्रकाशित इस संग्रह की ज़्यादातर कहानियाँ यूरोप की पृष्ठभूमि में लिखी गई हैं जिनमें ‘लन्दन की एक रात’, ‘अन्तर’ और ‘जलती झाड़ी’ जैसी प्रसिद्ध कहानियाँ भी शामिल हैं। इसी संग्रह में ‘माया दर्पण’ शीर्षक कहानी भी है जिस पर समानान्तर सिनेमा के चर्चित निर्देशक कुमार शाहनी ने इसी नाम से फ़ि‍ल्म बनाई थी जिसे 1973 में सर्वश्रेष्ठ हिन्दी फ़ि‍ल्म पुरस्कार प्राप्त हुआ था।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46910155030679,"sku":"9789360868147","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789360868147.webp?v=1770876835","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/9789360868147-jalti-jhadi","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}