{"product_id":"9789389243338-rahul-sanskrityayan-jinhe-seemayen-nahi-rok-saki","title":"Rahul Sanskrityayan : Jinhe Seemayen Nahi Rok Saki","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Jagdish Prasad Baranwal 'Kund'\u003cbr\u003e • Publisher: LokBharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: LokBharti Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eअद्वितीय प्रतिभा के धनी महापण्डित राहुल सांकृत्यायन की लेखनी से कोई भी ऐसी विधा अछूती नहीं रह गयी थी, जिसका सम्बन्ध जन-जीवन से हो । एक साथ कवि, कहानीकार, उपन्यासकार, आलोचक, भाषाशास्त्री, इतिहासकार, पुरातत्ववेत्ता, दार्शनिक, पर्यटक, समाज सुधारक, राजनेता, विज्ञान और भूगोल वेत्ता, गणितज्ञ, शिक्षक, कुशल वक्ता तथा जितने भी समाज के स्वीकार्य रूप हो सकते हैं, उनमे सब विद्यमान थे । अपने विचार स्वातंत्र्य के लिए ज्ञात राहुल जी ने जो भी लिखा, साक्ष्यसहित और निर्भीकतापूर्वक लिखा बिना यह सोचे कि उनके विचारों से किसी की भावना आहत भी हो सकती है । संघर्षो से भरा उनका जीवन अन्धविश्वास उन्मूलन और अमीरी गरीबी के भेद से रहित समानधर्मा समाज की स्थापना के लिए समर्पित था । इस त्याग के लिए उन्हें विरोधियों की आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा, जेल जीवन और दंड[प्रहार की यातनायें भी सहनी पड़ी थीं । वे कई भारतीय और विदेशी भाषाओँ के ज्ञाता थे किन्तु उनका हिंदी के प्रति प्रेम अटूट था । जन-जन में यात्राओं के प्रति उत्साह भरने वाले राहुल जी ने ऐसे-ऐसे दुर्गम स्थानों की यात्राओँ की हैं और उन्हें लिपिबद्ध किया है, जिनके बारे में सोचते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं ।.\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"LokBharti Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":46910145921175,"sku":"9789389243338","price":210.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789389243338.webp?v=1770876773","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/9789389243338-rahul-sanskrityayan-jinhe-seemayen-nahi-rok-saki","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}