{"product_id":"9789395328029-is-hamam-mein","title":"Is Hamam Mein","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Chitra Mudgal\u003cbr\u003e • Publisher: Remadhav Publications\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Remadhav Publications\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eकहानी को लेकर होनेवाली तमाम चर्चाओं को ध्यान में रखा जाए तो यह विश्वास करना पड़ेगा कि किसी के लिए कहानी केवल भाषा है, किसी के लिए केवल स्थिति चित्रण, कुछ के लिए केवल विचार है तो कुछ के लिए सिर्फ संवेदनाओं का अभिलेख। हरेक के अपने-अपने प्रवर्तक और समर्थक हैं, जो कभी इसे तो कभी उसे कहानी का शिखर घोषित करते रहते हैं। अपने उत्साह में वे यह भुला देते हैं कि कथा साहित्य के व्यापक कैनवस पर अलग-अलग रंगों के रूप में तो उनका कुछ महत्त्व हो सकता है, लेकिन किसी एक को ही कहानी का सर्वोच्च पैमाना नहीं बनाया जा सकता। अर्थरहित भाषा का झुनझुना कब तक बज सकता है, या जीवन-स्थितियों से रहित संवेदना का या संवेदनाविहीन जीवन-स्थितियों का क्या अर्थ है? बहुत से रचनाकार ऐसे हैं, जो प्रचलित मुहावरों और फैशनों से अप्रभावित रहते हुए इस बात के प्रति सचेत हैं कि कहानी वह सबकुछ है और इन सबसे मिलकर बनती है। चित्रा मुद्गल इन्हीं सचेत दृष्टि सम्पन्न रचनाकारों में हैं। उनकी कहानियों का मुख्य सरोकार समकालीन जीवन-स्थितियों में मनुष्य के भीतरी संसार का उद्घाटन है। लेकिन यह भीतरी कशमकश भी बदलते जीवन-परिवेश का आत्मीय ब्योरों और कलात्मक नजर के साथ अंकन भी करती चलती है। इस तरह ये इकहरी अभिव्यक्ति की कहानियाँ न होकर कई स्तरों पर प्रभावित करनेवाली कहानियाँ हैं। ये कहानियाँ मानवीय सम्बन्धों की आन्तरिक जटिलताओं का अंकन पात्रों को उनके परिवेश से काटकर शिमला या कश्मीर के डाकबँगलों में ले जाकर नहीं, बल्कि उनके दैनन्दिन जीवन के संघर्षों के बीच, सामाजिक व्यवस्था की पृष्ठभूमि में करती हैं, जहाँ रोजी-रोटी का संघर्ष भी है और पारिवारिक परम्पराओं तथा जीवन की रूढ़ स्थितियों से टकराव भी। —रमाकान्त\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Remadhav Publications","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46910140612759,"sku":"9789395328029","price":139.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789395328029.webp?v=1770876733","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/9789395328029-is-hamam-mein","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}