{"product_id":"aadyant-9788170556466","title":"Aadyant","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Dharamveer Bharti\u003cbr\u003e • Publisher: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eभारती जी की इन तमाम कविताओं में मार्क्सवाद से प्रभावित किशोरमन, देशभक्ति से ओतप्रोत, पूँजीवादी व्यवस्था के प्रति विद्रोही, ग़रीबी, भूख और गुलामी से व्याप्त कवि हृदय के साथ ही साथ उम्र के तकाजे से जीवन में आये प्रेम के प्रति आकृष्ट युवा होते मन की आहटें भी सुनाई देती हैं। यही वह उम्र रही होगी जब उनके प्रथम उपन्यास, 'गुनाहों का देवता' की कथावस्तु भी भीतर-ही-भीतर आकार लेना शुरू हुई होगी। उम्र के उस पड़ाव पर निराशा बड़ी जल्दी घेरती है 'मैंने प्यार किया — ग़लती की' या फिर 'प्रीति कर पछता रहा हूँ' जैसी कविताएँ उस समय के समाज में जीते युवक की स्पष्ट तस्वीर पेश करती हैं।अजब मज़ेदार समय था वह— उस ज़मान में प्यार की हिलोरें लेने के साथ ही साथ निराशा और विरह भी मन में घर करने लगते थे और कवि हृदय लोग बड़े शहीदाना अन्दाज़ में विरह और दुःख व घुटन को जीते चलते थे। 'जिस दिन से तुमसे प्यार हुआ नयनों में छाये आँसू कन, भर गया दर्द से कोमल मन!'उस समय कितने स्तरों पर किस तरह भारती के कवि मन का निर्माण हो रहा था, यह जानने और समझने के लिए बड़ी रोचक सामग्री प्रस्तुत करती हैं ये कविताएँ।\u003c\/p\u003e","brand":"Vani Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":46523083882647,"sku":"9788170556466","price":147.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788170556466.webp?v=1767179907","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/aadyant-9788170556466","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}