{"product_id":"aanjaney-jayte-9789387462335","title":"Aanjaney Jayte","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Giriraj Kishore\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e‘आंजनेय जयते’ गिरिराज किशोर का सम्भवत: पहला मिथकीय उपन्यास है। इसकी कथा संकटमोचन हनुमान के जीवन-संघर्ष पर केन्द्रित है। रामकथा में हनुमान की उपस्थिति विलक्षण है। वे वनवासी हैं\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eवानरवंशी हैं\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eलेकिन वानर नहीं हैं\u003cstrong\u003e;\u003c\/strong\u003e बल्कि अपने समय के अद्भुत विद्वान\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eशास्त्र-ज्ञाता\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eविलक्षण राजनीतिज्ञ और अतुलित बल के धनी हैं। उन्होंने अपने समय के सभी बड़े विद्वान ऋषि-मुनियों से ज्ञान हासिल किया है। उन्हें अनेक अलौकिक शक्तियाँ हासिल हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eतमाम साहित्यिक-सांस्कृतिक स्रोतों के माध्यम से गिरिराज किशोर ने हनुमान को वानरवंशी आदिवासी मानव के रूप में चित्रित किया है\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eजो अपनी योग्यता के कारण वानर राजा बाली के मंत्री बनते हैं। बाली और सुग्रीव के बीच विग्रह के बाद नीतिगत कारणों से वे सुग्रीव की निर्वासित सरकार के मंत्री बन जाते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइसी बीच रावण द्वारा सीता के अपहरण के बाद राम उन्हें खोजते हुए हनुमान से मिलते हैं। हनुमान सीता की खोज में लंका जाते हैं। सीता से तो मिलते ही हैं\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eरावण की शक्ति और कमज़ोरियों से भी परिचित होते हैं। फिर राम-रावण युद्ध\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eसीता को वनवास\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eलव-कुश का जन्म और पूरे उत्तर कांड की कहानी वही है\u003cstrong\u003e—\u003c\/strong\u003eबस\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eदृष्टि अलग है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eलेखक ने पूरी रामकथा में हनुमान की निष्ठा\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eसमर्पण\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eमित्रता और भक्तिभाव का विलक्षण चित्र खींचा है। उनकी अलौकिकता को भी महज़ कपोल-कल्पना न मानकर एक आधार दिया है। लेखक ने पूरे उपन्यास में उन्हें अंजनी-पुत्र आंजनेय ही कहा है\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eउनकी मातृभक्ति के कारण उपन्यास में सबसे महत्त्वपूर्ण उत्तरार्ध और क्षेपक है जो शायद किसी राम या हनुमान कथा का हिस्सा नहीं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eयहाँ हनुमान सीता माता के निष्कासन के लिए राम के सामने अपना विरोध जताते हैं और उन्हें राजधर्म और निजधर्म की याद दिलाते हैं। यहाँ यह कथा अधुनातन सन्दर्भों में गहरे स्तर पर राजनीतिक हो जाती है। वैसे\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eमूल रामकथा में बिना कोई छेड़छाड़ किए लेखक ने आंजनेय के चरित्र को पूरी गरिमा के साथ स्थापित किया है। यह एक बड़ी उपलब्धि है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e \u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285665374359,"sku":"9789387462335","price":105.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789387462335.webp?v=1769284014","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/aanjaney-jayte-9789387462335","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}