{"product_id":"abhi-raat-baki-hai-9789350002223","title":"Abhi Raat Baki Hai","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Jayant Pawar\u003cbr\u003e • Publisher: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e‘अभी रात बाकी है...’ मुंबई की कपड़ा मिलों के मजदूरों की ऐतिहासिक हड़ताल पर लिखा गया महत्त्वपूर्ण नाटक है। मुंबई जैसे महानगर की आज की समस्याओं का वास्तविक चित्रण इसमें किया गया है। नाटक से मनोरंजन की अपेक्षा रखने वाले कुछेक को यह रौद्र, भड़कीला और भय का रोमांच खड़ा करने वाला नाटक लग सकता है। यह सब हम रोजमर्रा की जिंदगी में जीते हैं, अखबारों में पढ़ते हैं, इसका अनुभव हमें नाटक पढ़ने के पश्चात् होता है। उसे पल भर के लिए भूलकर ऐसा कुछ आनंददायी, दिल बहलाने वाला दीजिए ऐसी शिकायत भी उनमें से कुछ लोग करते हैं। इस तरह की अनेक प्रतिक्रियाएँ मैंने नाटक के मंचन के बाद विचार-गोष्ठियों में सुनी हैं। मुझे इस नाटक में मिल कामगारों की ऐतिहासिक हड़ताल दिखाई दी। आज के महानगर के सवाल दिखे। ये सब कुछ परदा खोलने और पुनः बंद होने के बीच मंच पर घटी घटनाओं और संवाद के द्वारा लगातार सामने आता है। पर उससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि मैं अनजाने में ही खुद से मिला। और इसलिए मुझे यह नाटक मेरा अपना लगा। मुझे जो महसूस हुआ और जो मैं कहना चाहता हूँ, वह बहुत कुछ यह नाटक कहता है। नाटक और उसके पात्रों के रूप में जैसे मैं ही बोल रहा हूँ, ऐसा महसूस करते हुए, मैं अनजाने ही प्रेक्षागृह की कुर्सी से उठकर सीधे नाटक में कब पहुँच गया, यह मैं समझ नहीं पाया।—विजय तेंडुलकर\u003c\/p\u003e","brand":"Vani Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":46523093844119,"sku":"9789350002223","price":192.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789350002223.webp?v=1767179969","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/abhi-raat-baki-hai-9789350002223","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}