{"product_id":"aghoshit-ulgulan-9789392757778","title":"Aghoshit Ulgulan","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Anuj Lugun\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eसभ्यता के तथाकथित केन्द्रों से अपसरित आक्रामक विकास के विरुद्ध संघर्षरत नागरिकता के आत्मनिर्भर हाशियों के पक्ष में हिन्दी कविता को एक निर्णायक भंगिमा देने में अनुज लुगुन की कविता की अहम भूमिका रही है। आदिवासियत को जीवन-पद्धति के साथ-साथ एक वैचारिक अवधारणा के रूप में प्रतिष्ठित करते हुए उन्होंने प्रतिरोध की काव्य-चेतना को एक सशक्त मोर्चा देने का प्रयास निरंतर अपनी कविता में किया है। वे उस जीवन के बीचोबीच रहते आए हैं जो मुख्यधारा से दूर अपनी प्राकृतिक जिजीविषा और सम्पूर्णता के साथ पेड़ों, पहाड़ों, नदियों और पशु-पक्षियों से अपने आदिम रिश्ते निभाते हुए अपने अस्तित्व में सार्थक है और जिसे चाहें तो मुख्यधारा के विकल्प के रूप में भी देखा जा सकता है। लेकिन होता इसके विपरीत है। मुख्यधारा उस बहुरंगी जीवन को अपने जैसा कर लेना चाहती है, सो भी बिना उनकी मर्जी के। आदिवासियत का केन्द्रीय सरोकार इसी अनचाहे आप्लावन से बचे रहना है। यही उसका संघर्ष है और अनुज की कविताएँ लगातार इस संघर्ष के साथ चलती हैं।   \u003cbr\u003eअघोषित उलगुलान  में इस सफर की हर छवि अपने मूल मानवीय तर्क के साथ उपस्थित है। ये कविताएं आदिवासी जीवन के खूबसूरत बिम्ब हम तक पहुँचाती हैं तो आक्रान्ताओं के विरुद्ध तनी मुट्ठियों को भी स्वर देती हैं। देशों, भाषाओं और संस्कृतियों के पार जाते हुए वे हर उस असहाय के साथ खड़ी होती हैं जो परभक्षी सभ्यता के निशाने पर है, जिसे सत्ता और शक्ति की विभिन्न संरचनाओं ने गैरजरूरी के खाते में डाल दिया है।\u003cbr\u003eनींद के बारे में सबसे मीठे गीत गाने वाले तोतों और सहजीवी भाव से अपनी दैनंदिन मुश्किलों को आसान करते ग्रामीण जनों से लेकर क्यूबा और फिलिस्तीन तक फैले यातना और प्रतिरोध के चित्रों को वे सहज ही हमारे स्थानीय बोध का हिस्सा बना देते हैं—“टूटे पुल के उस पार\/फेंकता हूँ एक डोरी\/आदमीयत की टोली में\/आदमीयत के लिए संघर्ष कर रहे टोलों की ओर से”—आह्वान है पृथ्वी के किसी भी कोने में संघर्षरत आदमीयत को एक साथ होकर लड़ने का जिसे अनुज की कविता अनुभूति की प्रामाणिक छवियों के साथ हम तक पहुँचाती है। \u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285700272279,"sku":"9789392757778","price":139.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789392757778.webp?v=1769284106","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/aghoshit-ulgulan-9789392757778","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}