{"product_id":"alokuthi-9788119028757","title":"Alokuthi","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Vijay Gaur\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eआलोकुठि सुन्दरबन में होते हुए भी वहाँ के नक्शे में दर्ज नहीं है। इस महादेश के त्रासद विभाजन के वक्त तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से भारत आए अधिसंख्य दलित शरणार्थियों के जीवन में आलोकुठि इतिहास के अँधेरों से बाहर आने की छटपटाती हुई कहानी है जो सुन्दरबन के वास्तविक भूगोल में घटित होती है। बानी, रुक्मी और रूपेन हालदार जैसे चरित्र मारीच झांपी जैसे वास्तविक भूगोल में बार-बार निर्वासन की त्रासद कथा से साक्षात्कार करते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e1905 से लेकर बांग्लादेश बनने तक के काल खंड को छूती हुई यह कथा बंगाल से दंडकारण्य भेज दिए गए मनुष्यों की त्रासदी से साक्षात्कार कराती है। जड़ों को जमीन में जगह बनाने का स्वप्न गंगा-पद्मा की लहरों के साथ उपन्यास में हिलोरें लेता रहता है। लेकिन सुन्दरबन से दूसरे निर्वासन के लिए अभिशप्त शरणार्थियों की यह कथा उन मनुष्यों की त्रासदी को उजागर करती है जिसके बारे में इतिहास ने सायास चुप्पी साध रखी है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eहिन्दी में इस तरह के अछूते विषय पर यह सम्भवत: पहला उपन्यास है जिसको लिखने के लिए लेखक ने इतिहास के प्राय: विस्मृत कर दिए गए पक्ष को चुना। गंगा और पद्मा का जीवन्त भूगोल मनुष्य के जीवट और संघर्ष से भरी इस कथा को प्रामाणिकता प्रदान करता है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e— नवीन कुमार नैथानी\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285694341271,"sku":"9788119028757","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788119028757.webp?v=1769284087","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/alokuthi-9788119028757","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}