{"product_id":"anandmath-9789352211517","title":"Anandmath","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Bankimchandra Chattopadhyay\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eप्रस्तुत पुस्तक ‘आनन्‍दमठ’ में 1770 ई. से 1774 ई. तक के बंगाल का चित्र खींचा गया है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eयह उपन्यास या ऐतिहासिक उपन्यास से बढ़कर है। ऋषि बंकिम ने इसमें उस युग का सिर्फ़ फ़ोटो नहीं खींचा, बल्कि राष्ट्र-विप्लब के भँवर में फँसे कुछ ऐसे जीवन्‍त मनुष्यों के चित्र दिए हैं, जो आज भी हमें बड़े अपने लगते हैं। इनमें सामान्य स्त्री-पुरुष भी हैं और महापुरुष भी। वे आज भी हमें राष्ट्रोत्थान का मार्ग दिखाते हैं। यह मार्ग है संघर्ष का, अन्याय से लोहा लेने का।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eगीता की जो टेक है—युध्यस्व-युद्ध करो, वही टेक है ‘आनन्‍दमठ’ की। ‘भगवतगीता’ और ‘आनन्‍दमठ’, इन दोनों में पलायनवाद नहीं है। इसलिए हमारे स्वतंत्रता-संग्राम के दौरान ‘गीता’ को जो महत्त्व मिला, उससे कम महत्त्व ‘आनन्‍दमठ’ को नहीं दिया गया। इसीलिए ‘आनन्‍दमठ’ के सन्‍तान-व्रतधारियों का गीत ‘वन्दे मातरम’ हमारा राष्ट्रगीत है।\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285687656599,"sku":"9789352211517","price":139.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789352211517.webp?v=1769284071","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/anandmath-9789352211517","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}