{"product_id":"andhere-mein-buddha-9789360861049","title":"Andhere Mein Buddha","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Gagan Gill\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eउनींद, अवसाद, शोक, स्मृतियाँ, आत्मा के ख़ाली पात्र को भरता एकान्त और उसे वापस सोख लेता अकेलापन, मृत्यु, बिछोह और दुख, ‘अँधेरे में बुद्ध’ की कविताएँ ऐसे ही तत्वों से बनी हैं। ये कविताएँ जितनी अपने बारे में हैं उतनी ही दूसरों के बारे में, और उन चीज़ों के बारे में जो सबकी हैं, जैसे सपने, जैसे हताशाएँ, जैसे पीड़ा।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eये कविताएँ अपने आधे सिर के दर्द के साथ कभी ईश्वर से संवाद करती हैं, कभी अपनी देह से, कभी-कभी उन लोगों से भी जो चले गए, लेकिन जो हमारी देह की किसी टीसती नस में अभी भी जीवित बहते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eये कविताएँ उन ततैयों के बारे में भी हैं जो जीवन की दीप्ति में प्रकाशमान हमारे माथों के भीतर चुपचाप बैठे रहते हैं, और व्यर्थताबोध की किसी तीखी कौंध में अचानक भन्नाने लगते हैं, और बेशक उनके बारे में भी जो चुप बैठते ही नहीं, रात-दिन भन्नाते ही रहते हैं—हर साँस पर और तेज़।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eदुख के खोटे सिक्के को बचाने को व्याकुल इन कविताओं में प्रेम का दुख भी है, आत्मा और देह के दुख भी हैं, इतिहास के दुख भी हैं, जीवन की दैनिंदिनी की मशीन से झरते दुख भी हैं...और वह दुख भी है जो बस इसीलिए होता है, क्योंकि हम होते हैं, जिसे बुद्ध ने देखा। \u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285672353943,"sku":"9789360861049","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789360861049.webp?v=1769284030","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/andhere-mein-buddha-9789360861049","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}