{"product_id":"asur-adivasi-9789389742121","title":"Asur Adivasi","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Shrirang\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eविलुप्ति के कगार पर खड़ी भारत की एक सबसे प्राचीन मानी जानेवाली असुर आदिवासी जनजाति पिछले दिनों काफ़ी चर्चा में रही है। अपनी कुछ ख़ास विशेषताओं, मान्यताओं और कुछ ख़ास माँगों के कारण इसने सभ्य समाज का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eदरअसल इस असुर जनजाति के लोग लौह अयस्क को खोजनेवाले तथा लौह धातु से हथियार आदि निर्माण करनेवाले विश्व की चुनिन्दा जनजातियों में से एक हैं। ये लोग अपने को पौराणिक असुरों का वंशज मानते हैं। पिछले दिनों ये चर्चा में तब आए जब इनके कुछ बुद्धिजीवी कार्यकत्ताओं ने यह माँग उठाई कि दशहरा में दुर्गा की महिषासुर मर्दिनी की जो प्रतिमा लगाई जाती है तथा उसमें उन्हें हिंसक रूप और महिषासुर का वीभत्स तरीक़े से वध करते हुए दिखाया जाता है, इससे उनकी भावना को ठेस पहुँचती है। यह उनके पूर्वजों का ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण असुर आदिवासी समुदाय का अपमान है। सभ्य समाज के लिए ऐसा वीभत्स और अभद्र अमानवीय प्रदर्शन सभ्यता के विरुद्ध है। इसलिए इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285555994775,"sku":"9789389742121","price":420.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789389742121.webp?v=1769283748","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/asur-adivasi-9789389742121","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}