{"product_id":"atrikta-sataren-9788183618977","title":"Atrikta Sataren","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Anita Rakesh\u003cbr\u003e • Publisher: Radhakrishna Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Radhakrishna Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e‘चन्द सतरें और’, ‘सतरें और सतरें’, ‘अन्तिम सतरें’ और अब यह ‘अतिरिक्त सतरें’—यह शृंखला अनीता राकेश की उन यादों का सफ़र है, जिन्हें उन्होंने मोहन राकेश के साथ बिताए अपने जीवन में सँजोया। इस सफ़र में उन्होंने अपनी उन ख़ुशियों, चुनौतियों, परेशानियों और दु:खों का बेबाक वर्णन किया है जो उनके आजीवन अनुभव का हिस्सा होकर रह गए।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eराकेश से मुलाक़ात के समय वह स्वयं लेखक नहीं थीं, लिखना उन्होंने बाद में शुरू किया, जिसके पीछे कुछ राकेश की प्रेरणा का बल था, और कुछ नए अनुभवों की अतिरिक्त का आवेग। परिणाम यह कि कहानीकार के रूप में भी उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई, लेकिन ज़्यादा वक़्त नहीं बीता कि मोहन राकेश अकाल ही हमसे और उनसे विदा हो गए। यह घटना उनके लिए एक बड़ी त्रासदी थी जिससे उबरने की प्रक्रिया में ही इन पुस्तकों \u003cbr\u003eकी रचना सम्भव हुई और अनीता जी के लिए यह प्रक्रिया आज दशकों बाद भी जारी है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e‘अतिरिक्त सतरें’ में उन्होंने वापस उन दिनों को टटोला है जब वे राकेश से मिलीं, उनको समझना शुरू किया और अन्तत: एक सपने के सच होने की तरह वे एक हो गए।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eउम्मीद है सतरें-शृंखला की अन्य पुस्तकों की तरह यह कड़ी भी पाठकों को अपने मन के नज़दीक लगेगी।\u003c\/p\u003e","brand":"Radhakrishna Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285588631703,"sku":"9788183618977","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788183618977.webp?v=1769283817","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/atrikta-sataren-9788183618977","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}