{"product_id":"aviral-9789352660728","title":"Aviral","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Anand Prakash Maheshwari\u003cbr\u003e • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eजन सेवा में रहकर जन व्यवस्था के अनेक आयाम देखने को मिलते हैं। पुलिस सेवा और भी करीब से कई रूप दिखा देती है। बात कुछ नहीं होती। फिर भी बात से बतंगड़ बन जाता है। अलग-अलग पहलुओं से उन्हें परखा जाता है। विभिन्न घटक उन्हें अपने सामर्थ्य के हिसाब से अपने रंग में ढालने का प्रयास करते हैं। व्यवस्थागत आयाम भी राजनैतिक, प्रशासनिक, वैधानिक एवं साक्ष्यगत पहलुओं से गुजरते हैं। फिर शुरू होता है अनियंत्रित विडंबनाओं का सिलसिला। एक लहर से अनेक लहरें। फिर वह सैलाब कब थमेगा और किस स्वरूप में नए आयाम उभरकर सामने आएँगे, यह कह पाना कठिन हो जाता है। स्मृतियों में अनेक कुंठाएँ घर कर लेती हैं, जो कि कब विकराल हो उठेंगी, यह भी कहना मुश्किल है। जन व्यवस्था की यह यात्रा अविरल है। विभिन्न जातियों, समूहों एवं संस्कृतियों में समरूपता, सामंजस्य एवं सद्भाव की दिशा में प्रयास अथवा मध्यम मार्ग एवं परस्पर संतुलन के विकल्प? इस पुस्तक के माध्यम से कथानक के रूप में कई रुचिकर पहलुओं को उजागर किया गया है, जो कि जन व्यवस्था के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हैं और जनजागृति की दिशा में मुक्त रूप से सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करते हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":46839571775639,"sku":"9789352660728","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789352660728.webp?v=1769161410","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/aviral-9789352660728","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}