{"product_id":"bahujan-sahitya-ki-saiddhantiki-9788119989973","title":"Bahujan Sahitya Ki Saiddhantiki","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Pramod Ranjan\u003cbr\u003e • Publisher: Radhakrishna Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Radhakrishna Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eसामाजिक आन्दोलनों और साहित्य में बहुजन अवधारणा को लेकर इधर के वर्षों में चर्चा तेज हुई है। देश भर में बहुजन साहित्य पर केन्द्रित आयोजन स्वत:स्फूर्त ढंग से हो रहे हैं जिनमें बड़ी संख्या में लोग भागीदारी कर रहे हैं। ये आयोजन हिन्दी पट्टी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दक्षिण भारत राज्यों में भी हो रहे हैं। बहुजन साहित्य की अवधारणा कई स्तरों पर विचरोत्तेजक है। लेकिन सही मायने में यह प्रगतिशील, जनवादी और दलित साहित्य का विस्तार है और उनका स्वाभाविक अगला मुकाम भी।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eतीन खंडों में विभाजित यह किताब बहुजन साहित्य के इतिहास और दर्शन से परिचय करवाती है तथा इस पर आधारित व्यावहारिक आलोचना की एक बानगी भी प्रस्तुत करती है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eकिताब का पहला खंड बहुजन साहित्य की अवधारणा पर केन्द्रित है, इसमें इसकी सैद्वान्तिकी के विविध पहलुओं पर विमर्श है। दूसरा खंड इसके इतिहास से परिचित करवाता है। तीसरे खंड में बहुजन आलोचना की बानगी प्रस्तुत की गई है।\u003c\/p\u003e","brand":"Radhakrishna Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285695193239,"sku":"9788119989973","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788119989973.webp?v=1769284090","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/bahujan-sahitya-ki-saiddhantiki-9788119989973","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}