{"product_id":"banusnama-9789377372620","title":"Banusnama","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Asghar Wajahat\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eउस दिन अचानक मानुस और बानुस आमने-सामने आ खड़े हुए। दरअसल बानुस नाम भी उन्हें मानुसों ने ही दिया। उन्हें तो यह भी मालूम नहीं था कि नाम होता क्या है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e फिर वे जंगल में आस-पास साथ-साथ रहने लगे; और तब उनके बीच के असली फ़र्क सामने आए। बात बस इतनी नहीं थी कि मानुसों ने अपने आगे के दो पैरों को खड़े होकर हाथ बना लिया था, वे उन हाथों से ऐसे काम भी करने लगे थे जिनके बारे में बानुसों को समझ ही नहीं आता कि उन्हें करना ही क्यों है!\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e पत्थरों को किसलिए तोड़ना है? पेड़ों की टहनियों को पेड़ों से छीनकर घसीटते हुए क्यों कहीं ले जाना है! घोड़ों को बाड़े में किसलिए बंद करना है? और फिर बानुसों को ही ये कह देना कि अब तुम जंगल छोड़कर कहीं और चले जाओ, जहाँ चाहो! क्या बेतुकी बात!\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e लेकिन बानुसों को भागना पड़ा, मानुसों से बचने के लिए; लेकिन अब मानुसों ने उन्हें पकड़ना शुरू किया और न जाने कहाँ ले जाने लगे...तो बानुसों और मानुसों की यह दास्तान दरअसल प्रकृ‌ति और मनुष्य के द्वंद्व की दास्तान है। दास्तानगोई के रिवायती फ्रेम में कसी यह दास्तान बताती है कि मनुष्य कैसे वाचाल होता गया, और प्रकृति कैसे स्तब्ध; मनुष्य कैसे गतिमान होता गया, और प्रकृति कैसे असहाय; मनुष्य कैसे सामर्थ्यवान होता गया और प्रकृति अपनी अथाह शक्ति के बावजूद कैसे मनुष्य की शक्ति-लालसा का निरीह शिकार!\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e लेकिन प्रकृति पर मनुष्य की यह विजय क्या सचमुच उतनी स्थायी है, जैसी उसे मालूम पड़ रही है? शायद नहीं! दूसरों को भले जीत ले मनुष्य, अपने भीतर अपने ही ख़िलाफ़ चलने वाले संग्राम से कैसे जीतेगा!\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":47929319587991,"sku":"9789377372620","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789377372620.webp?v=1781763054","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/banusnama-9789377372620","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}