{"product_id":"bhagvadgita-ke-anmol-moti-9789386001795","title":"Bhagvadgita Ke Anmol Moti","description":"\u003cp\u003e • Author(s): G.K. Varshney\u003cbr\u003e • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.\u003cbr\u003e • BISAC: Hinduism - General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eइस पुस्तक में भगवद्गीता की विषय-वस्तु को प्रस्तुत करने के लिए एक नवीन दृष्टिकोण को अपनाया गया है। गीता को भली-भाँति समझने के लिए, इसकी संपूर्ण विषय-सामग्री को नौ प्रमुख प्रधान संकल्पनाओं\/धारणाओं में विभाजित किया गया है। समस्त सामग्री जो किसी एक संकल्पना से संबंधित है, परंतु जो गीता के विभिन्न अध्यायों के अंतर्गत एक स्थान पर व्यक्त किया गया है। तत्पश्चात्, प्रत्येक संकल्पना के अंत में उसका निष्कर्ष दिया गया है। इस पुस्तक की एक उल्लेखनीय विशिष्टता यह है कि इस पूरी पुस्तक में यह प्रयास किया गया है कि गीता के श्लोकों के अर्थों को सटीक, जैसे वे हैं, वैसा ही रखा जाए और उनमें अपने मनोभावों तथा अपनी श्रद्धा का पुट लगाकर उन्हें अधिक सुशोभित न किया जाए। लेखक इस बात के प्रति पूर्ण सतर्क रहा है कि स्पष्टीकरण, व्याख्याएँ संक्षिप्त रहें, सुस्पष्ट रहें तथा प्रसंग\/विषय के अनुकूल रहें। एक ऐसा विशिष्ट प्रयत्न किया गया है कि इस पुस्तक को पढ़नेवाले प्रत्येक व्यक्ति को यह स्पष्ट रूप से समझ आए कि ‘‘किस संबंध में गीता क्या कहती है तथा गीता का सार क्या है?’’ वास्तव में यह एक नवीन दृष्टिकोण है जो इस पुस्तक को अपनी श्रेणी की एक अद्वितीय पुस्तक बनाता है।\u003c\/p\u003e","brand":"Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46839687807127,"sku":"9789386001795","price":88.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789386001795.webp?v=1769162193","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/bhagvadgita-ke-anmol-moti-9789386001795","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}