{"product_id":"bharatiya-vangmay-evam-kalkram-kinnar-darshan-9789355623621","title":"Bharatiya Vangmay Evam Kalkram: Kinnar Darshan","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Reshma Prasad\u003cbr\u003e • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eराम की बधाई परंपरा विधर्मी की चादर से ढक गई है। उस चादर को किस तरीके से हटाया जा सकता है। सनातन धर्म के उन मूल्यों को स्थापित किया जा सकता है, जिन मूल्यों के आधार पर यह परंपरा निरंतर चलती हुई आ रही है। यह परंपरा अब अपराधीकरण और आर्थिक उपार्जन का साधन बन गई है। परंपरा के नाम पर गृहस्थ भाव के व्यक्ति ने तपस्वी भाव को समाप्त कर दिया है। पहचान के संघर्ष को इस तरीके से समाज में ले गए कि आज समुदाय की पहचान समाज में डर की हो गई है।इस डर को किस तरीके से निकाला जाए। समुदाय को सनातन धर्म की परंपराओं के अनुसार वापस लाया जाए। इसे सिर्फ जीविकोपार्जन के साधन के रूप में समझौतावादी स्थितियों से न गुजारा जाए। इसके लिए किस तरीके से कार्य किया जा सकता है कि किन्नर समुदाय के मठ और मंदिर स्थापित हों और उनमें नशे के आदी और सेलिब्रिटी पहचान की जरूरत वाले व्यक्ति शामिल न हों। पुस्तक को अलग-अलग तरीके से साक्ष्य के साथ प्रस्तुत किया गया है।किन्नर समुदाय की कला एवं परंपरा को कैसे पुनः स्थापित किया जा सकता है, इस पर भी प्रकाश डाला गया है।\u003c\/p\u003e","brand":"Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46839649435799,"sku":"9789355623621","price":140.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789355623621.webp?v=1769161936","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/bharatiya-vangmay-evam-kalkram-kinnar-darshan-9789355623621","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}