{"product_id":"bhartiya-sanskriti-9788180315930","title":"Bhartiya Sanskriti","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Dr. Santosh Kumar Chaturvedi\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eभारतीय संस्कृति का विश्व संस्कृति में अपना अनुपम स्थान है। यह जीवन के भौतिक पक्ष की अपेक्षा आध्यात्मिक पक्ष पर बल देती है। साथ ही यह व्यक्तित्व के एक कल्पनाशील एवं भावना- प्रवण, उदार एवं सौम्य आदर्श पर जोर देती रही है। यह आदर्श अत्यन्त प्राचीन काल से लेकर आज तक किसी न किसी रूप में स्पष्ट दृष्टिगोचर होता रहा है। अपनी ग्रहणशीलता एवं समन्वय की प्रवृत्ति के चलते यह हमेशा परिष्कृत होती रही है एवं समय के साथ चलती रही है। संस्कृति ही सामाजिक एवं ऐतिहासिक धरातल प्रदान करती है। संस्कृति की रश्मियों से ही किसी भी व्यक्ति का व्यक्तित्व सजता, संवरता एवं निखरता है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eसंस्कृति वह सामाजिक विरासत हैं जिससे परम्परा से कला-कौशल, विचार-व्यवहार, आदतें, नैतिक मूल्य आदि समावेशित हो जाते हैं। संस्कृति से हीन परिवार, समाज या राष्ट्र की कल्पना करना गप्प हाँकने जैसा है। इन संस्थाओं की निर्मिति में संस्कृति आधाररूप में कार्य करती है। संस्कृति के माध्यम से ही समाज के नवयुवक अपने देश की परम्परा- धर्म, दर्शन, इतिहास, ज्ञान-विज्ञान एवं विरासत से परिचित हो पाते हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285548490903,"sku":"9788180315930","price":228.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788180315930.webp?v=1769283732","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/bhartiya-sanskriti-9788180315930","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}