{"product_id":"daalchini-9789377376758","title":"Daalchini","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Dushyant\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003eदालचीनी\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e प्रेम के बारे में एक अलग तरह का उपन्यास है जिसमें दो कहानियाँ एक-दूसरे के साथ-साथ, एक-दूसरे को सहारा देते हुए चलती हैं। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e एक कहानी है मुम्बई में फ़िल्म लेखन के क्षेत्र में संघर्षरत अदीब की, और दूसरी कहानी है उस पांडुलिपि की जो उसे एक कबाड़ी की दुकान में पड़ी मिल जाती है। इस पांडुलिपि में भी प्रेम का ही आख्यान है, लेकिन इसकी पृष्ठभूमि वह युग है जब राजे-महाराजों के दरबार कलाओं को संरक्षण दिया करते थे। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e क्या हर युग में प्रेम और प्रेम करने वाले एक ही जैसे होते हैं, क्या प्रेम तत्वत: एक काल-निरपेक्ष सत्य है, जो तब भी रहता है जब ऊपरी तौर ख़त्म होता दिखता है? ऐसे प्रश्नों पर मंथन करते हुए और दो युगों को प्रेम की कसौटी पर कसते हुए, दो भिन्न समयों के प्रेम को समझने की कोशिश करते हुए यह उपन्यास उन सवालों को भी छूता चलता है जो दो व्यक्तियों की सोच के द्वंद्व से उभरते हैं। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e लेकिन कई कथा-उपकथाओं में विचरण करता यह उपन्यास यहीं तक सीमित नहीं रहता, सतलुज से जुड़ी अनेक स्मृतियों, पटियाला घराने की शास्त्रीय गायकी और बुज़ुर्गों की आती-जाती बातों-यादों से रचा-बसा यह पाठ एक गझिन पठनीय अनुभव की रचना करता है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":47716885364887,"sku":"9789377376758","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789377376758.webp?v=1776940566","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/daalchini-9789377376758","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}