{"product_id":"daastan-e-guru-dutt-9789377371678","title":"Daastan-E-Guru Dutt","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Mahmood Farooqui\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003e‘दास्तान-ए-गुरुदत्त’\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e उस गुरुदत्त के दुःख और सृजनात्मक उल्लास की कथा है जिसने अपने वक़्त से आगे बढ़कर ‘प्यासा’, ‘काग़ज़ के फूल’ और ‘साहब बीबी और गुलाम’ जैसी फिल्में भारतीय सिनेमा को दीं। उस गुरुदत्त की जिसने बहुत कम उम्र में अपनी उम्मीदों-आकांक्षाओं के बाग़ों को खिलते भी देखा, और बहुत कम ही उम्र में अपने तमाम हासिल को परे रखकर उदासी की ऐसी राह पकड़ी जो कभी पलट न सकी। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e गुरुदत्त की दास्तान समाज के पाखंड और इनसान के पैदा किए रिवाज़ों से असहमत हर उस बेचैन रूह की दास्तान है जो इस दुनिया को, बड़े होने के इसके तमाम दावों से इतर, वास्तविक अर्थों में इसे बड़ा देखना चाहती है। ऐसी दुनिया जहाँ कोई किसी का ग़ुलाम न हो, कोई किसी का शिकार न हो। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e इस दास्तान में गुरुदत्त नाम की उस विकट पहेली की ज़िन्दगी के दृश्य भी हैं, उसकी जो फ़िल्में आज क्लासिक कही जाती हैं, उनके बनने की कहानी भी है, उसकी शादीशुदा ज़िन्दगी के उतार-चढ़ाव, इश्क़, उसके शौक़ और उसकी ख़ुदकुश रचनात्मकता के क़िस्से भी, साथ ही हिन्दी सिनेमा के उस निर्णायक दौर की दिलचस्प जानकारी भी।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e और यह दास्तान कही दास्तानगोई के उस्ताद महमूद फ़ारूक़ी ने!\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":47716885102743,"sku":"9789377371678","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789377371678.webp?v=1776940562","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/daastan-e-guru-dutt-9789377371678","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}