{"product_id":"dayan-9788126701407","title":"Dayan","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Bhishma Sahni\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eभीष्म साहनी ऐसे कथाकार थे जिन्हें किसी आन्दोलन ने न कभी विचलित किया, न प्रेरित किया। कला और यथार्थ के साथ उनका अपना निजी रिश्ता था, जिसे उन्होंने आख़‍िर तक अक्षत बनाए रखा। जीवन, जीवन को चुनौती देनेवाले विद्रूप और उसे बल देनेवाले सौन्दर्यबोध की शाश्वत मौजूदगी, यही उनका संसार था।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e'डायन' का प्रकाशन 1998 में हुआ था, और यह उनके जीवन-काल में प्रकाशित उनका अन्तिम कहानी-संग्रह था। इसके बाद उनका उपन्यास 'नीलू नीलिमा निलोफ़र' और आत्मकथा 'आज के अतीत' ही प्रकाशित हुए। आज़ादी की पचासवीं वर्षगाँठ पर प्रकाशित इस संकलन में भी उस पीड़ा की तारतम्यिक उपस्थिति दिखाई देती है जिससे भीष्म जी की संवेदना आज़ादी की शुरुआती सुबहों से ही जुड़ गई थी और जिसका चरम 'तमस' में प्रकट हुआ—विभाजन और साम्‍प्रदायिक क्रूरता।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइस संकलन की 'बीरो' कहानी पुनः विभाजन की तरफ़ लौटती है, वह बीरो जो बँटवारे के वक़्त पाकिस्तान में रह गई थी, और बाद में सलीमा बनकर वहीं की हो गई। लेकिन भीतर के तार जो सीमाओं की बाड़ को लाँघकर दोनों मुल्कों की गलियों में बार-बार आ पहुँचते है, अब भी बीरो के ह्रदय में सजीव हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e'डायन' कहानी मध्यवर्गीय मानसिकता की ऊहापोह का बिम्ब है। अन्य कहानियाँ भी पचास\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285678776471,"sku":"9788126701407","price":207.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126701407.webp?v=1769284046","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/dayan-9788126701407","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}