{"product_id":"dhokha-9789350007600","title":"Dhokha","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Surajpal Chauhan\u003cbr\u003e • Publisher: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eधोखा - सूरजपाल चौहान दलित साहित्य लेखन के अब उस मुक़ाम तक आ पहुँचे हैं जहाँ किसी अन्य द्वारा परिचय करवाने की दरकार उन्हें नहीं है। सामान्यतः उनकी ख्याति का दारोमदार बोल्ड दलित आत्मकथा लेखन पर निर्भर माना जाता रहा है, लेकिन यह उनके लेखन का एक खास पहलू है। दरअसल एक समर्थ दलित लेखक की छवि बनाने में सिर्फ़ उनकी आत्मकथाएँ ही नहीं, बल्कि उनके साथ उनकी कविता और कहानी साहित्य भी शामिल है। आत्मकथा हो या कहानी या कविता, उनका एक ख़ास मिज़ाज और अन्दाज है और वह है अपनी बात की बेलाग अभिव्यक्ति जिस प्रकार आज के दलित लेखन का सामान्यबोध अपनी (निजी) और काफ़ी हद तक अपने समाज की नागवार बातों को प्रतिबन्धित करने और सवर्ण समाज के मुद्दों पर बड़बोलेपन का शिकार हो जाता है, सूरजपाल चौहान का रचनाकर्म सामान्यतः इस प्रकार के दोमुँहेपन का हामीदार नहीं है। वे जिस अधिकार के साथ सवर्ण समाज का नंगापन उघाड़ते हैं, उसी प्रकार दलित समाज की हकीकतों और कमज़ोरियों का भी साक्षात्कार हमें करवाते हैं। इसलिए आगे के पड़ाव पर इससे कुछ और बेहतर करने की उम्मीद है। -प्रो. दयाशंकर\u003c\/p\u003e","brand":"Vani Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46523053605015,"sku":"9789350007600","price":51.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789350007600.webp?v=1767179733","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/dhokha-9789350007600","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}