{"product_id":"dr-rammanohar-lohia-ka-samajwadi-darshan-9788180317422","title":"Dr. Rammanohar Lohia Ka Samajwadi Darshan","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Tarachand Dixit\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eडॉ. लोहिया का समाजवादी चिन्तन देश-प्रेम एवं जन-कल्याण की भावनाओं से ओतप्रोत है\u003cstrong\u003e,\u003c\/strong\u003e उसका दर्शन नितान्त मौलिक है। जहाँ वे मार्क्स या गांधी से असहमत हैं\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eउन्होंने अत्यन्त निर्भीकता एवं ईमानदारी से अपनी असहमति व्यक्त की है। उन्होंने समाजवाद पर अत्यन्त गहराई से सोचा-समझा है। उनके समर्थकों का दावा है कि समाजवाद का अस्थिपंजर तो बहुत पहले से तैयार हो गया था\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eडॉ. लोहिया ने इसमें ‘फ्लैश एंड ब्लड’ डालकर इसको एक नया जीवन दिया है। उनका समाजवादी दर्शन मानवतावाद की पूर्ण अभिव्यक्ति है। उनके सिद्धान्त और कर्म वे आधार हैं जिन पर एक नवीन विश्व-व्यवस्था\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eनवीन संस्कृति और नवीन सभ्यता के कल्याणकारी भवन निर्मित हो सकते हैं और उनमें सम्पूर्ण मानवता जाति\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eधर्म\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eवंश\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eलिंग\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eसंस्कृति\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eसम्पत्ति आदि की भिन्नता (कटुता) से मुक्त हो निवास कर सकती है। इसमें कोई सन्देह नहीं कि लोहिया जी भारत के ही नहीं\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eअपितु विश्व के मौलिक राजनीतिक विचारकों में प्रतिष्ठित स्थान रखते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eप्रस्तुत पुस्‍तक में न तो डॉ. लोहिया की अन्धविश्वास के साथ प्रशंसा की गई है और न ही किसी पूर्वग्रह के साथ आलोचना। जहाँ उनकी प्रशंसा अपेक्षित है वहाँ प्रशंसा की गई है और जहाँ आलोचना आवश्यक है वहाँ आलोचना। इस प्रकार इस दृष्टि को सामने रखकर डॉ. लोहिया के सम्बन्ध में सम्यक् विचार प्रस्तुत किए गए हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइस पुस्तक में डॉ. लोहिया के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डालने के अतिरिक्त समाजवाद की विशिष्टताओं को देते हुए डॉ. लोहिया द्वारा चलाए गए समाजवादी आन्दोलन का भी उल्लेख किया गया है। डॉ. लोहिया की सामाजिक साधना\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eसमाजवादी राज्य का स्वरूप एवं उसके प्रशासनिक ढाँचे का तुलनात्मक ढंग से उल्लेख किया गया है। भाषा-विषयक विचारों और लोहिया की मौलिक अधिकार-सम्बन्धी धारणा का विश्लेषण भी किया गया है। विश्व की समाजवादी विचारधारा को डॉ. लोहिया की देन\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eविश्व-समाजवाद का नवदर्शन\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eसंयुक्त राष्ट्रसंघ का पुनर्गठन\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eविश्व सरकार\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eविश्व विकास समिति\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eअन्तरराष्ट्रीय जाति-प्रथा उन्मूलन\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eसाक्षात्कार का सिद्धान्त\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eनिशस्त्रीकरण आदि विषयों से सम्बन्धित उनकी विचारधाराएँ स्पष्ट की गई हैं। मार्क्स\u003cstrong\u003e, \u003c\/strong\u003eगांधी और डॉ. लोहिया के समाजवादी दर्शनों का तुलनात्मक विवेचन कर यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि किस प्रकार मार्क्स और गांधी-दर्शनों का संशोधन एवं समन्वय कर डॉ. लोहिया ने उन्हें पूर्ण किया और एक नया सन्तुलन और सम्मिलन का दर्शन जन-मानस को दिया।\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285575819415,"sku":"9788180317422","price":210.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788180317422.webp?v=1769283787","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/dr-rammanohar-lohia-ka-samajwadi-darshan-9788180317422","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}