{"product_id":"ek-chuhe-ki-maut-9789395737272","title":"Ek Chuhe Ki Maut","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Badiuzzaman\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eएक लम्बा-चौड़ा चूहाख़ाना और अनगिनत चूहेमार। छोटे, बड़े और फिर और बड़े। ठौर-ठौर चूहेमार प्रस्ताव, चूहेमार योजनाएँ और चूहेमार कार्यक्रम। जगह-जगह ज़िन्दा-मुर्दा चूहों का अम्बार, हाहाकार। कटे-फटे अंगों और सड़ रही लाशों की असह्य दुर्गन्ध। फिर भी अबाध चूहेमारी— प्रतिभा, योग्यता और कार्यक्षमता का एकमात्र प्रमाण, जन-कल्याण का एकमात्र रास्ता। मजबूर हैं एक-दूसरे के मातहत चूहे मारते चूहेमार; अभिशप्त, भयभीत और नियतिबद्ध हैं चूहेमारी के लिए; अन्यथा उन्हें ख़ुद चूहों में बदल जाना होगा— मर जाना होगा एक चूहे की मौत!\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eवस्तुतः सुपरिचित हिन्दी कथाकार बदीउज़्ज़माँ का यह बहुचर्चित उपन्यास फ़ंतासी के माध्यम से एक ऐसी समाज-व्यवस्था का चित्रण करता है जो पूरी तरह मानव-विरोधी है और जिसमें मानवीय गरिमा तथा मानव-अस्तित्व दोनों मूल्यहीन हो चुके हैं। फ़ंतासी के बावजूद लेखक ने स्थितियों का जैसा वास्तविक चित्रण किया है उससे हम अपने समय, समाज और व्यवस्था-तंत्र को साफ़ तौर पर देख और महसूस कर सकते हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285694537879,"sku":"9789395737272","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789395737272.webp?v=1769284087","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/ek-chuhe-ki-maut-9789395737272","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}