{"product_id":"garud-kisne-dekha-hai-9789388933131","title":"Garud Kisne Dekha Hai","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Shrikant Verma\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e‘गरुड़ किसने देखा है’ श्रीकान्त वर्मा का छठा काव्य-संग्रह है, जो उनके निधन के लगभग वर्ष-भर बाद प्रकाशित हो रहा है। उनका पिछला संग्रह ‘मगध’ कवि की संवेदना को जिस निर्णायक बिन्दु पर छोड़ गया था, प्रस्तुत संग्रह उसके बाद की रचनात्मक यात्रा का प्रामाणिक दस्तावेज़ है। यहाँ एक ही साथ एक कलात्मक परिणति तक पहुँचे हुए कवि की परिपक्वता भी मिलेगी और एक नए प्रस्थान की छटपटाहट भी। यहाँ तक आते-आते कवि का अनुभव-लोक नई भावभूमियों के संस्पर्श से और समृद्ध हुआ है और शायद इसी के चलते कवि की भाषा में एक नई सरलता आई है और एक पारदर्शी विनयशीलता भी, जो सिर्फ़ श्रेष्ठ कविता में पाई जाती है। इस संग्रह की कविताओं का एक छोर काशी को छूता है, दूसरा सुदूर पेरिस को और इस तरह बनता है कवि की रचनात्मक यात्रा का एक पूरा इतिहास और भूगोल—और दोनों अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही साथ।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eप्रस्तुत संग्रह की कविताएँ बीसवीं शताब्दी के अँधेरे से निकलने की कोशिश से पैदा होनेवाली कविताएँ हैं। इसीलिए यहाँ केवल अतीत की पीड़ा और वर्तमान की कड़वाहट ही नहीं, ‘भविष्य को न भुला पाने’ की एक रचनात्मक तड़प भी है। मृत्यु के विरुद्ध लड़ते हुए कवि की इन कविताओं में जीवन का एक गहरा स्वीकार है और उसके प्रति एक सच्ची, पीड़ाभरी मानवीय ललक भी। यही बात ‘गरुड़ किसने देखा है’ को विशिष्ट बनाती है और सार्थक भी। कवि के ही शब्दों में—\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eकितना लुभावना कितना सरल\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eनिरर्थक होते हुए भी सार्थक है\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eयह संसार।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285690671255,"sku":"9789388933131","price":207.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789388933131.webp?v=1769284077","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/garud-kisne-dekha-hai-9789388933131","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}