{"product_id":"geysers-9789390971664","title":"Geysers","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Tr. Vertul Singh\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan, Raza Foundation\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan, Raza Foundation\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eरज़ा के व्यक्तिगत संग्रह से—पत्राचार में रज़ा—प्रस्तुत किया जा रहा है। यह संकलन मुख्य रूप से उस दौर से सम्बन्धित है जब भारत में आधुनिक कला आन्दोलन सक्रिय होकर एक आकार ले रहा था, और रज़ा और उनके मित्र यानी हुसेन, सूज़ा, बाकरे, बाल छाबड़ा, अकबर पदमसी, रामकुमार, तैयब मेहता, गायतोण्डे, परम्परा के पुनरुत्थान के इस ऐतिहासिक संघर्ष में शामिल थे जहाँ वे, उस अधिकांशत: भारतीय आधुनिकतावाद की रचना कर रहे थे जोकि दर्शन और शैली की बहुलता में निहित था और जिसमें आलोचनीयता तथा ग्रहणशीलता दोनों का समावेश था। वे एक-दूसरे से पत्रों के द्वारा अपने व्यक्तिगत मुद्दों के साथ-साथ उस सौन्दर्यशास्त्र पर भी चर्चा किया करते जिसे वे व्यक्त करने का प्रयास कर रहे थे। वे अपने हर्ष, चिन्ता तथा सरोकारों का साझा करते, और यदाकदा वित्त और आवास भी। वे एक-दूसरे के प्रयासों तथा समस्याओं, सफलताओं और असफलताओं के प्रशंसक थे तथा कभी-कभी एक-दूसरे के प्रति सहज तथा निष्पक्ष विचारों को भी व्यक्त करने में संकोच नहीं करते। इन पत्रों के माध्यम से हम उस दौर के एक बेहद अन्तरंग स्वगत ख़ाका और साथ ही एक वैयक्तिक प्रक्षेपवक्र को भी चित्रित कर सकते हैं जो इन कलाकार मित्रों और कामरेड्स ने उकेरा।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan, Raza Foundation","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285601607831,"sku":"9789390971664","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789390971664.webp?v=1769283850","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/geysers-9789390971664","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}