{"product_id":"ghar-ka-jogi-jogda-9788126712403","title":"Ghar Ka Jogi Jogda","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Kashinath Singh\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e‘\u003cstrong\u003eगरबीली गरीबी वह\u003c\/strong\u003e’ \u003cstrong\u003eके बारे में\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eअद्भुत रचना है काशी का संस्मरण—जिस ऊष्मा, सम्मान और समझदार संयम से लिखा गया है, वह पहली बार तो अभिभूत कर लेता है। मैं इसे नामवरी सठियाना-समारोह की एक उपलब्धि मानता हूँ। साथ ही मेरी यह राय भी है कि अगर ऐसी क़लम हो तो हिटलर को भी भगवान बुद्ध का अवतार बनाकर पेश किया जा सकता है। (मज़ाक़ अलग) व्यक्तित्व के अन्तर्विरोधों पर भी कुछ बात की जाती तो शायद और ज़्यादा जीवन्त संस्मरण होता!\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e—राजेन्द्र यादव\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eघर का जोगी जोगड़ा\u003c\/strong\u003e \u003cstrong\u003eके बारे में\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eकाशीनाथ सिंह का आख्यानक उनके रचनात्मक गद्य की पूरी ताक़त के साथ सामने आया है। काशी के पास रचनात्मक गद्य की जीवन्तता है—गहरे अनुभव-संवेदन हैं। उनकी भाषा को लेकर और अभिव्यक्ति भंगिमाओं को लेकर काफ़ी कुछ कहा गया है, परन्तु जो बात देखने की है, वह यह है कि अपनी ज़मीन और परिवेश से काशी का कितना गहरा रिश्ता है। संस्मरण को जीवन्त बना देने का कितना माद्दा है। काशी पूरी ऊर्जा में बहुत सहज होकर लिखते हैं और जब ‘भइया’ सामने हों तो वे अपनी रचनात्मकता के चरम पर पहुँचते हैं और महत्त्वपूर्ण के साथ-साथ तमाम मार्मिक और बेधक भी हमें दे जाते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e—डॉ. शिवकुमार मिश्र।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285593055383,"sku":"9788126712403","price":210.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126712403.webp?v=1769283827","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/ghar-ka-jogi-jogda-9788126712403","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}