{"product_id":"gulara-begum-9788193969281","title":"Gulara Begum","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Sharad Pagare\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Subject: Hindi Literature\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e‘‘रुचि बराबर क़ायम रहती है, जो सफलता का बड़ा प्रमाण है। ऐतिहासिक विषय के साथ न्याय किया गया है, उपन्यास की माँग को निबाहते हुए भी। यह क्षमता रचना से सिद्ध होती है।’’    \u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e—जैनेन्द्र कुमार\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e \u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e‘‘किसी अच्छी रचना का पहला गुण सम्प्रेषणीयता होती है, वह इसमें है। निरन्तर आगे पढ़ते रहने की उत्सुकता बनी रहती है। उस युग का वातावरण प्रामाणिक लगता है। कहानी का ढंग आकर्षक है। जो चरित्र निर्मित हुए हैं, वे भी विश्वसनीय लगते हैं। अबू-छंगी, इनू-सलमा की कहानियाँ अधिक प्रामाणिक बन गई हैं। चरित्र की दृष्टि से सलमा सर्वोत्तम है। पढ़ने में मन रमता है। कहानी कहने के ढंग से रोचकता बढ़ गई है।’’    \u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e—विष्णु प्रभाकर\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e \u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e‘‘उपन्यास के बुनने में बड़ा परिश्रम किया है। और इसकी अन्तर-कथाओं के ताने-बाने बड़े कौशल से तैयार किए गए हैं। भाषा को भी सँवारा है।’’    \u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e—शिवमंगलसिंह ‘सुमन’\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285756764311,"sku":"9788193969281","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788193969281.webp?v=1769284123","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/gulara-begum-9788193969281","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}