{"product_id":"hansi-aur-des-9789347043963","title":"Hansi Aur Des","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Rupam Mishra\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eरूपम मिश्र की कविताओं की ‘आत्मा का आयतन’ बड़ा है। इन कविताओं में समाज और राजनीति के फासीवादी दौर में संवेदनशील लोगों के भीषण अन्तर्द्वंद्व अंकित हुए हैं। यहाँ ‘न्याय के लिए तड़पता मन’ है तो अपनापन खोजते थकता-हारता मन भी है और उसी क्षण भाग जाने का भी एक मन है। यहाँ गाँव-क़स्बे में सदियों से गंगा-जमुनी तहज़ीब का देशज मर्सिया है, मुसलमान जोगियों के डर ने उनके बिरहों और निर्गुण सारंगी को ख़ामोश किया है, वही ख़ामोशी इन कविताओं में गूँज उठी है। \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003e‘हँसी और देस’\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e में जैसे कोई बड़ी ठेठ ज़िद्दी निगाहों से सूचना-संचार के मायाजाल और नफ़रत की बाज़ारू सियासत को बेध रहा है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e यहाँ कितनी ही कहानियाँ हैं—बहुत सी तो ऐसी जो बिसरा दिए जाने की कगार पर हैं, लेकिन आदमीपने के अकाल में लड़ते हुए मनुष्यों के जीते रहने की तमन्ना भी है। लोक-रहन, माटी-पानी और हरियाली को मिटते देखना त्रासद है, इस त्रासदी में प्रेम मानो एक आपद्धर्म है, उनके पूरी तरह मिट जाने से पहले ही मिलन की चाह है क्योंकि उनसे विरहित दुनिया में प्रेम का कोई परिवेश न होगा। भले ही ‘नैतिकता की रंगदारी वसूलते लफुए’ हर कहीं दिखते हों लेकिन असम्भव समझ लिए गए प्रतिरोध की छवियाँ जो अभी भी वास्तव हैं, (बस हमने नज़रें फेर ली हैं), उन्हें इस संग्रह की कविताएँ आँख में उँगली डालकर दिखाती हैं। इन कविताओं में हिन्दी का बहुभाषिक वैभव चमकता है। यहाँ अवध के गँवई मुहावरों और शब्दों का भाषिक छिड़काव नहीं, बल्कि अनुभव और सोच की मातृभाषा का आत्मविश्वास है। रूपम की काव्यभाषा जनता की जनवादी राजनीति के संक्रामक हो उठने के क्षण में उससे गलबहियाँ को आतुर है। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e —प्रणय कृष्ण\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":47716883955863,"sku":"9789347043963","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789347043963.webp?v=1776940563","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/hansi-aur-des-9789347043963","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}