{"product_id":"hasil-aur-anya-kahaniyan-9788126715602","title":"Hasil Aur Anya Kahaniyan","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Rajendra Yadav\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eप्रख्यात कथाकार राजेन्द्र यादव की इन कहानियों के केन्द्र में है, स्त्री-पुरुष सम्बन्ध। सामन्ती मानदंडों और मूल्यों से ग्रस्त लोगों के लिए ये कहानियाँ ‘अश्लील, आपत्तिजनक, फूहड़ और कुंठित व्यक्ति की सेक्स-भड़ास’ हो सकती हैं। लेकिन नए मानवीय विवेक के आधार पर स्त्री-पुरुष सम्बन्धों को देखने-परखने वाले पाठक इन कहानियों में उस स्त्री की करुणा और प्रतिरोध को भी लक्षित कर सकते हैं जो उसी बिस्तर से मुक्ति का नया द्वार ढूँढ़ने की बेचैन कोशिश कर रही है जहाँ वह अब तक पुरुष की हवस और क्रूरता की शिकार होती रही है। कथाकार ने खलनायकत्व का ख़तरा उठाकर भी इन कहानियों के माध्यम से पुरुष वर्ग की हिंस्र लम्पटता को परत-दर-परत उघाड़ कर रख दिया है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eकई दशकों के बाद राजेन्द्र यादव की कहानियों का यह नया संग्रह सामने आ रहा है। अपने शैली लाघव और जीवन की जटिलताओं को भीतर तक उकेरनेवाली ये कहानियाँ परिपक्व कथाभाषा के कारण भी पाठकों का ध्यान खींचेंगी। लेकिन बहुत सम्भव है कि इन कहानियों के विस्फोटक और विवादास्पद कथ्य ही चर्चा में रहे और बाक़ी बातों की ओर सुधी आलोचकों का ध्यान नहीं जाए। ये कहानियाँ मध्यवर्गीय पाठक ही नहीं, हिन्दी कथालोचना के सामने भी एक बड़ी चुनौती पेश करती हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285655675031,"sku":"9788126715602","price":88.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126715602.webp?v=1769283986","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/hasil-aur-anya-kahaniyan-9788126715602","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}