{"product_id":"hindi-sahitya-ka-samikshatmak-itihas-9788183614184","title":"Hindi Sahitya Ka Samikshatmak Itihas","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Vijaypal Singh\u003cbr\u003e • Publisher: Radhakrishna Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Radhakrishna Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eहिन्दी साहित्य में रीति काव्य, ख़ासतौर से केशव पर डॉ. विजयपाल सिंह की पुस्तकें अत्यन्त लोकप्रिय रही हैं। इस पुस्तक में उन्होंने असाधारण प्रवाह के साथ हिन्दी साहित्य के विभिन्न चरणों और प्रवृत्तियों का समीक्षात्मक अध्ययन किया है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eअभी तक उपलब्ध विभिन्न विद्वानों द्वारा लिखे गए इतिहासों को ध्यान में रखते हुए तथा नए तथ्यों को समाहित करते हुए इस पुस्तक में उन्होंने प्रयास किया है कि आरम्भिक काल से लेकर आधुनिक साहित्य तक का विस्तारपूर्वक विवेचन प्रस्तुत किया जा सके।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eलेखक ने इस कृति को ग्यारह खंडों में विभाजित किया है। खंडों का विभाजन साहित्येतिहास के आलोचकों, समीक्षकों तथा साहित्येतिहासकारों, अनुसन्धानों तथा टिप्पणियों के विश्लेषण और पुनर्मूल्यांकन के आधार पर किया गया है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eलेखक ने डॉ. ग्रियर्सन, हजारीप्रसाद द्विवेदी, मिश्र-बन्धुओं, रामकुमार वर्मा, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, इडविन ग्रिब्ज जैसे विद्वानों द्वारा किए काल खंडों का भी पुनर्मूल्यांकन और विश्लेषण किया है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eपुस्तक के लेखन में विद्वान आलोचक ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि विद्वज्जनों के साथ-साथ यह पुस्तक छात्रों, शोधार्थियों और सामान्य पाठकों के लिए भी सहज ग्राह्य हो।\u003c\/p\u003e","brand":"Radhakrishna Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285533319319,"sku":"9788183614184","price":697.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788183614184.webp?v=1769283707","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/hindi-sahitya-ka-samikshatmak-itihas-9788183614184","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}