{"product_id":"hostel-ke-panno-se-9788126720156","title":"Hostel Ke Panno Se","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Manoj Singh\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: Ancient, Classical \u0026amp; Medieval\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eस्वतंत्र, स्वच्छन्द और उन्मुक्त जीवन जीने की लालसा रखनेवाले आज के युवाओं की संवेदनाओं का विश्लेषण करनेवाला एक विशिष्ट उपन्यास। इसमें बदलते समाज की उस तसवीर को चित्रित किया गया है जो वैश्वीकरण और उदारवादी संस्कृति से उत्पन्न वातावरण में दृष्टिगोचर होती है। समाज में इधर एक बड़ा परिवर्तन हुआ है। नई युवा पीढ़ी निरन्तर एक खुलेपन के माहौल में जीना चाहती है जहाँ लिंग-भेद से परे जाकर समाज में एक सहज समानता हो। इस सामाजिक क्रान्ति को लेखक ने एक हॉस्टल में रहनेवाले युवाओं को केन्द्र में रखकर अभिव्यक्त किया है जो नई सोच के साथ नए विचारों को सहज रूप से स्वीकृति प्रदान करते हैं और सभ्यता, संस्कृति पर किसी भी प्रकार का प्रहार किए बिना एक सामंजस्य भी बनाते हैं।उपन्यास इस परिवर्तन के संक्रमणकाल पर भी दृष्टिपात करता है और यह प्रश्न भी छोड़ता है कि आज जब स्कूल, कॉलेज और तकनीकी संस्थाओं तक में ‘को-एड’ है तब यह कैसे सम्भव है कि लड़के-लड़की के बीच स्वाभाविक और प्राकृतिक आकर्षण न हो?लेखक ने वर्जनाओं से रहित जीवन जीनेवाली युवा पीढ़ी के प्रति एक सार्थक समझ को जाग्रत् करने के साथ-साथ परम्परावादी सोच की कठोर नियमावली के बीच जीनेवाले रूढ़िवादी समाज के प्रति एक समन्वयवादी सोच को बनाने का प्रयास भी किया है।आधुनिक युवाओं की मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्याओं पर एक रोचक उपन्यास जो अपनी सहज भाषा-शैली से पाठक के अन्तर्मन को स्पर्श करता है।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":48265320824983,"sku":"9788126720156","price":315.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126720156.webp?v=1789380039","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/hostel-ke-panno-se-9788126720156","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}