{"product_id":"intizar-nai-mausam-ka-9788181431097","title":"Intizar Nai Mausam Ka","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Ed. by Nusrat Mohiuddin\u003cbr\u003e • Publisher: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eशायरी के साथ जिंदगी और सियासत की सरगर्मियों और पेचीदगियों को वाबस्ता करके नुसरत की शायरी परवान चढ़ती है। इनकी तरक्की पसंद शख़्सियत का प्रमाण इनकी नज़्मों में बाकायदा दिखाई देता है, जहाँ वे सब्जेक्ट को ही नहीं लफ़्ज़ और रूप को भी नयापन देते हैं। इनके “फार्म” में प्रगतिशील लेखन का वह पूरा दौर नुमाया होता दिखाई देता है, जिसका नज़रिया साफ़ ज़ेहन से चीज़ों को साफ़-साफ़ देखकर साफ़-साफ़ बयान करने का हिमायती रहा है।नुसरत मोहिउद्दीन एक बड़े शायर के फरजंद हैं लेकिन यह परिचय ही पर्याप्त नहीं है। एक शायर के रूप में नुसरत की अपनी खुसूसियतें हैं जो नज़्मों में तो उभरकर दिखाई देती हैं, ग़ज़लों से भी झाँकती महसूस होती हैं। इसकी वजह कई हो सकती हैं। लेकिन एक वजह इनका तरक्की . पसंद नज़रिया है, जहाँ सपने और हक़ीक़त की टकराहट से कई धड़कनें वजूद में आती हैं। क्योंकि ये धड़कनें हैं, इसलिए लंबाई में इनके महत्त्व को नहीं नापा जा सकता। छोटी-छोटी नज़्में भी गहरी चोट करती हैं और एक तराशे हुए मुख़्तसर बुत की तरह ध्यान आकर्षित करती हैं। नुसरत की शायरी में अगर जिंदगी की पथरीली सच्चाइयाँ हैं तो हुस्नोशबाब का वसीला भी है। लेकिन हर हाल में उसका निशाना समाजी हक़ीक़त से जुड़ा हुआ है।\u003c\/p\u003e","brand":"Vani Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":46523056619671,"sku":"9788181431097","price":65.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788181431097.webp?v=1767179739","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/intizar-nai-mausam-ka-9788181431097","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}