{"product_id":"itihas-aur-aalochak-drishti-9788180317903","title":"Itihas Aur Aalochak Drishti","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Ramswaroop Chaturvedi\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eसाहित्य जीवन की पुनर्रचना है तो आलोचना साहित्य की पुनर्रचना है। साहित्य के इतिहास को तब जीवन, साहित्य और आलोचना की गति तथा उनके आपसी रिश्तों को समझना तथा व्याख्यायित करना है। रचना से पुनर्रचना के इन स्वचेतन होते क्रमिक चरणों में वैचारिकता का सम्पर्क बढ़ता जाए तो यह स्वाभाविक है। इस स्थिति में कह सकते हैं कि साहित्य का इतिहास अनुभव और विचार की अन्तर्क्रिया की पुनर्रचना है। और उसके लिए सबसे बड़ी समस्या और चुनौती यह है कि अपने स्वयं तो इतिहास की प्रक्रिया में अंगीकृत हो।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e‘इतिहास और आलोचक-दृष्टि’ में हिन्दी साहित्य के इतिहास का एक नए स्तर पर अनुभावन और विवेचन सम्भव हुआ है। पूरे अध्ययन में दो प्रक्रियाएँ साथ-साथ चलती हैं। एक ओर तो ख्यात आलोचकों के वैशिष्ट्य का रूप उभरता है, और दूसरी ओर उनके द्वारा विवेचित अलग-अलग इतिहास-युगों का चित्र स्पष्ट होता चलता है। इतिहास और आलोचना का हिन्दी साहित्य के सन्दर्भ में ऐसा सम्पृक्त और द्वन्द्वात्मक रूप पहली बार देखने को मिलता है। कविता-यात्रा और गद्य की सत्ता के विविध रूपों के विवेचन और भाषिक सर्जनात्मक अन्वेषण के बाद समीक्षक ने अगले चरण में इतिहास-आलोचना की विशिष्ट प्रक्रिया का यह अध्ययन प्रस्तुत किया है, जिस विकास-क्रम में उसकी प्रामाणिकता प्रशस्त होती है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eहिन्दी साहित्य के इतिहास का कोई भी अध्ययन इस कृति के द्वारा समृद्ध और समग्रतर होगा।\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285536432279,"sku":"9788180317903","price":207.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788180317903.webp?v=1767668587","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/itihas-aur-aalochak-drishti-9788180317903","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}