{"product_id":"jab-neel-ka-daag-mita-champaran-1917-9788126730513","title":"Jab Neel Ka Daag Mita : Champaran-1917","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Pushyamitra\u003cbr\u003e • Publisher: Sarthak (An imprint of Rajkamal Prakashan)\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Sarthak (An imprint of Rajkamal Prakashan)\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eसन् 1917 का चम्पारण सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में महात्मा गांधी के अवतरण की अनन्य प्रस्तावना है, जिसका दिलचस्प वृत्तान्त यह पुस्तक प्रस्तुत करती है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eगांधी नीलहे अंग्रेज़ों के अकल्पनीय अत्याचारों से पीड़ित चम्पारण के किसानों का दु:ख-दर्द सुनकर उनकी मदद करने के इरादे से वहाँ गए थे। वहाँ उन्होंने जो कुछ देखा, महसूस किया वह शोषण और पराधीनता की पराकाष्ठा थी, जबकि इसके प्रतिकार में उन्होंने जो कदम उठाया वह अधिकार प्राप्ति के लिए किए जानेवाले पारम्परिक संघर्ष से आगे बढ़कर 'सत्याग्रह’ के रूप में सामने आया। अहिंसा उसकी बुनियाद थी।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eसत्य और अहिंसा पर आधारित सत्याग्रह का प्रयोग गांधी हालाँकि दक्षिण अफ़्रीका में ही कर चुके थे, लेकिन भारत में इसका पहला प्रयोग उन्होंने चम्पारण में ही किया। यह सफल भी रहा। चम्पारण के किसानों को नील की ज़बरिया खेती से मुक्ति मिल गई, लेकिन यह कोई आसान लड़ाई नहीं थी।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eनीलहों के अत्याचार से किसानों की मुक्ति के साथ-साथ स्वराज प्राप्ति की दिशा में एक नए प्रस्थान की शुरुआत भी गांधी ने यहीं से की। यह पुस्तक गांधी के चम्पारण आगमन के पहले की उन परिस्थितियों का बारीक ब्यौरा भी देती है, जिनके कारण वहाँ के किसानों को अन्तत: नीलहे अंग्रेज़ों का रैयत बनना पड़ा।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइसमें हमें अनेक ऐसे लोगों के चेहरे दिखलाई पड़ते हैं, जिनका शायद ही कोई ज़िक्र करता है, लेकिन जो सम्पूर्ण अर्थों में स्वतंत्रता सेनानी थे।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइसका एक रोचक पक्ष उन किंवदन्तियों और दावों का तथ्यपरक विश्लेषण है, जो चम्पारण सत्याग्रह के विभिन्न सेनानियों की भूमिका पर गुज़रते वक़्त के साथ जमी धूल के कारण पैदा हुए हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eसीधी-सादी भाषा में लिखी गई इस पुस्तक में क़िस्सागोई की सी सहजता से बातें रखी गई हैं, लेकिन लेखक ने हर जगह तथ्यपरकता का ख़याल रखा है।\u003c\/p\u003e","brand":"Sarthak (An imprint of Rajkamal Prakashan)","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285696110743,"sku":"9788126730513","price":123.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126730513.webp?v=1769284092","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/jab-neel-ka-daag-mita-champaran-1917-9788126730513","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}